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जगतहितकाऱणी
कि जो हिन्दू-मुसलमान के त्यौहार बनाए है कि ताजिया और रेवाड़ी कृष्ण महाराज की निकला करती है, सो "त्यौहार तो अगले लोगों ने धर्म के वास्ते बनाए है।" सो फकीरों को और साधु-संत को खाना खिलावें तो यह धर्म की बातें है और जो आपस में खाना खिलाया-पिलाया करें तो वोह हेत इरादा है; सो त्यौहार तो हेत इरादे के वास्ते अपनी-2 जात में न्यारे-2 बनाए हैं, सो हिन्दू-मुसलमान की बुद्धि राक्षसी जाल से ऐसी भ्रष्ट कर दी है कि जो त्यौहार में भी आपस में ही लड़कर मरते हैं, सो सब विलायतों के राजा बादशाह इस बात को गौर करके देखो और ख्याल करो कि हिन्दुस्तान के लोगों की बुद्धि कैद करदी है कि जो भाई-2 की बुराई करते है और आपस में कट-2 के मर जाते है। इसी तरह से, जबकि रावण वगैरा ने बुद्धि खराब की थी जब भी संसार के लोग आपस में कट-2 के मर जाते थे; और रावण ने छल करके शिवजी और रामचंद्रजी और ऋषिश्वरों वगैरा को भुला दिया था और जब शनिचरजी ने रावण का छल शिवजी, रामचंन्द्रजी और ऋषिश्वरों वगैरा को वाकिफ किया था फिर वोह छल में नहीं पडे़, जब ही हम तुम आप-2 के बुजर्गों की औलाद और राजा बादशाहों की औलाद और ऋषिश्वरों की औलाद और सब संसार की औलाद जीती है। अब यह बनियों का जाल प्रगट हुआ है सो यह छल बहुत कुछ करेंगे, पहले तो बादशाहों को छल करके भुला दिया था, क्या जाने क्या छल किया था ? सो तो इनकी यहीं जानें, जिसका सबूत यह है कि अगले बादशाहों ने इनके मंदिरों की पुतलियों वगैरा के नाक और कान कटवाकर मंदिरों को गिरवा दिए थे, और यह बनिये बेईमान गाये-सूअर की कसमें खाकर बच गए; और उन बादशाहों के मरने के बाद फिर औलाद को गारत कर दिया। सो यह हिन्दुस्तान में देख लो और पैसा वगैरा जो बादशाहों ने इनसे लिया होगा वोह भी फिर उनको गारत करके ले लिया होगा, और उनकी औलाद को बिलकुल खराब कर दिया, और दुनिया को दिन-2 खराब करके कम करते जाते हैं, क्योंकि पहले दुनिया में आदमी बहुत थे कि "जब रामचंद्रजी महाराज ने रावण का जाल मिटाने को लंका पर चढ़ाई की थी उस वक्त फौज में 'अठारह पदम' आदमी थे और फौज में लड़ने वाले जवान-2 आदमी गए होंगे और बुड्ढे-डोकरे और औरत-बच्चे पीछे बी रहे होंगे" तो ख्याल करो कि उस वक्त आदमी कितने होंगे और अब 'मरदम शुमारी' में देखो कि हिन्दुस्तान में कितने आदमी हैं ? तो पहले से बहुत थोड़े हैं, परन्तु कोई भी ख्याल नहीं करते और बनिये अनेक तरह से संसार को मारते हैं और गुरुनानक ने अपनी पोथी में ऐसा लिखा है कि "इन काफिरों का ऐतबार कभी नहीं करना चाहिए, चाहे यह इस कदर कसमें क्यों न खावें, कि जैसे कोई आदमी मरे हुए भी घी के कुप्प में हाथ घुसेड़ देवे और फिर उस हाथ को निकाल के तिलों में घुसेड़ें, तो घी के भरे हुए हाथ में बेशुमार तिल लग जावें, इस कदर कसमें खावें तब भी काफिरों का ऐतबार न करना चाहिए।" इसी तरह से कृष्ण महाराज के वक्त में संसार कंश राजा और हरनाकुश और कारुन वगैरा के छल में नहीं पड़ा; क्योंकि शनिचरजी, कृष्ण महाराज और नरसिंहजी महाराज और गुरुनानकजी महाराज ने वाकिफ कर दिया था इस वास्ते छल में नहीं पड़े, इससे अपने-2 बुजर्गों की औलाद बची है, अगर सब संसार राक्षसों के छल में पड़ जाता तो गारत कर देते। इसी तरह से जो मेरे जीतेजी बनिये अपना जाल छोड़ देवे
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