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जगतहितकाऱणी
वहमों का तो संसार में पार ही नहीं है और संसार के नामका पाप कराके कुछ का कुछ बुरा कर देते है; और संसार में नुकसान पाप से करा देते हैं जिससे वहमों को सच्चा जानने लगते हैं। सो जिस दिन से राक्षसी पाप चलाया है उस दिन से बहम करके और बुरा करा देते हैं, इससे संसार में वहम चला है; सो सब संसार गुप्ती पाप को छोड़ाओगे जब सबको आराम मिलेगा कि जैसा सतजग में था, वैसा ही हो जावे जबकि पाप को छोड़ा दोगे जब पीछे सतजग हो जावेगा, और सदा सतजग ही रहेगा; और तुम जो यह कलजग-2 कहते हो, सो कलूकाल कोई चीज नहीं है, यह तो बनियों ने राक्षसी पाप चलाया है सो रावण, हरनाकुश के मुवाफिक पाप चलाया है, सो इसका नाम बनियों ने कलूकाल रख दिया है। सो जिस तरह से कि रावण ने संसार के नामका पाप कराके सबकी बुद्धि भ्रष्ट कर दी थी, उसी तरह से इन बनियों ने भी चकवे राज करने की वजह से सबकी बुद्धि भ्रष्ट कर दी है, सो इस कलूकाल के पाप को सब मिलके छोड़ाओगे तो सदा सतजग ही है, अगर पाप को फिर कभी नहीं चलने दोंगे और पूरा-2 बंदोबस्त सब विलायतों में रखोगे तो सब संसार में सुख रहेगा। सो यह 'जाल कदीम से बनियों का ही है और हिन्दुस्तान में से ही चला है', सो हिन्दू-मुसलमानों ने इन बनियों के शामिल ही जनम पाया है, और एक ही टापु के रहने वाले हैं, सो सब संसार के लोग भी कहते है कि एक मुलक वाले शख्सों के हेत इरादा बहुत होता है कि जो आपस में लाज-शरम रखते हैं, और गैर के पास अपनी लाज-शरम को नहीं जाने देते है; सो एक मुलक के रहने वाले, एक-2 की शरम संसार में सदा रखते आए है परन्तु इन बनिये बेईमानों ने अपने मतलब के वास्ते क्या जाल किया है कि जो कदीमी पाप है उसको अपने पास रखते है और उस कदीमी पाप में से थोड़ा-सा हिन्दू-मुसलमानों को छल करके और सिखाके रावण, हरनाकुश, कंश, कारुन वगैरा को छल के अन्दर डाल के गारत कराया और भुलाया कि तुम चार कूंट में राज करना; सो राज का करना तो किधर ही को गया, बलके अपनी-2 औलादों को जाल ही जाल में मरवा दिए, परन्तु यह बनिये शामिल ही के शामिल रहे है और उन्हों को अपने जाल की इन बनियों ने जरा भी खबर नहीं पडंने दी, हालांकि उन्होंने इन बनियों के शामिल ही जनम पाया था, परन्तु जाल ही जाल में हिन्दुस्तान के लोगों को गारत कर दिया, उसी तरह से अब यह बनिये दूसरी विलायतों से मिलने लगे है। सो आप लोगों को और अंग्रेजों को और 'रुम-सूम' को और दूसरी विलायतों को रावण, हरनाकुश वगैरा की तरह से छल करके चकवे राज करने के लिए यह बनिये आप लोगों को छल के अन्दर डालेंगे, कि जिस तरह से हिन्दुस्तान के लोगों को जाल में डाल के गारत कर दिया है, उसी तरह से आएप लोगों को बहका-2 के और कदीमी पाप में से थोड़ा-2 सिखा के और कुल विलायतों में राज करने के वास्ते तुमको भी बहकाके थोड़ा बहुत पाप सिखा देंगे, सो चार कूंट में राज करने के वास्ते तुमको भी बहका देंगे, सो आप लोग भी भूल जाओगे; क्योंकि रावण, हरनाकुश ने शामिल ही जनम पाया था, सो उनको भी बनियों ने जाल ही जाल में मरवा दिये, परन्तु हिन्दुस्तान के लोगों को अब तक इन्हों के जाल की खबर नहीं की बनियों का जाल है; और हिन्दुस्तान को तो परचों के भरोसे भुलाई है और जाल को ही परचा जानते हैं और कहते है कि मालिक के घर की कुदरत है और देवतों के परचा वगैरा है। इस-2 तरह के जाल बनियों ने चला रखे है कि जिसका कुछ अंदाज नहीं है, सो आप लोगों को ख्याल करना चाहिए कि जिस तरह से हिन्दुस्तान तबाह हो गया है और जो किसी कदर बाकी रहा है उसको आप लोगों को लालच देते तबाह करा देंगे; इसी तरह से कुल विलायतें तबाह हो जावेगी, जब सब विलायतों में थोड़े-से आदमी रह जावेंगे तो यह बनिये सब विलायतों में राज करेंगे, इस वास्ते यह जादू का पाप चलाया है जब यह बनिये राज करेंगे कि जब एक-आध विलायत बाकी रहेगी जब यह बनिये राक्षसी पाप से उनकी भी बुद्धि भ्रष्ट कर देंगे, जब आपस में लड़कर भाई-भाई मर जावेंगे। सो इसमें झूठ होवें तो हिन्दुस्तान में देखलो,
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