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जगतहितकाऱणी
वहीं राक्षस विद्या करने वाले और उनकी राक्षस विद्या है और यह ख्याल नहीं करेंगे कि यह तो भूल से देवतों के उपर जीव चढ़ाते हैं; क्योंकि बनियों ने राक्षस विद्या के पाप से बुद्धि भ्रष्ट कर दी है और राक्षस विद्या है बनियों के घर की। सो ख्याल नहीं करेंगे यह बनियों ने अक्लमंदी की है कि हमारा जाल किसी पर प्रगट न हो और हमको कोई भी इन्द्रजालियाँ नहीं जानें, इस वजह से डाकनों वगैरा के सर और देवी-देवतों के सर बदनामी लगा दी है और मुलकों-2 में मरी और काल वगैरा जो पड़ जाते हैं वोह सब बनियों के जादू से हो जाते हैं और संसार को सुझाते हैं कि "मंगल भारी था और शनिचर के ग्रह बहुत तेज थे, और शुक्र निहायत खराब है।" सो मंगल व शनिचर व शुक्र वगैरा भी आदमी थे, सो वोह तो अपनी उमर पाके मर गए, सो वोह तो इस जमीन पर अब कहाँ से आवें ? और इसी तरह से कभी-2 देवी-देवतों का भी सुझाते हैं कि देवी स्वर्ग से उतरेगी वोह 'खप्पर' भरेगी; सो जब बनिये तमाम मुलकों के नाम का पाप कराते हैं तो तमाम मुलकों में मरी पड़ जाती है और जो थोड़े-से गाँवों के नामका पाप करावें तो थोड़े से गाँवों में मरी पड़ जावे। सो इसका हाल तुम संसार के लोग हर बरस टीपणों में सुनते हो, परन्तु मैं तो एक-दो बात लिखता हूँ और जो कि टीपणों में जिस कदर हाल राक्षस विद्या का लिखा आता है वोह सब हो जाता है सो सुनते ही हो कि जो अनेक तरह के ग्रह गोता दुनिया में लगा दिए हैं। सो तुम हिन्दू-मुसलमान और अंग्रेज वगैरा टीपणों वगैरा में सुनते ही हो, सो यह टीपणे बनियों ने पहले से चला दिए हैं और ब्राह्मणों को पकड़ा दिए हैं, जिस तरह से कि रावण ने राक्षस विद्या चलाई थी और रावण ने ऋषिश्वरों की बुद्धि भ्रष्ट करके राक्षस विद्या के टीपणे पकड़ा दिए थे, सो अब इसी तरह से इन बनियों ने भी राक्षस विद्या के टीपणे ब्राह्मणों की बुद्धि भ्रष्ट करके ब्राह्मणों को मराने के लिए पकड़ा दिए हैं, परन्तु इन बनियों ने ऐसी अकलमंदी की है कि इन्होंने राक्षसी पाप की खबर किसी को भी नहीं पड़ने दी है, और जो संसार के लोग और राजा बादशाह समझ भी गए तो यही जानेंगे कि राक्षस विद्या ब्राह्मणों के घर की है और टीपणे भी इन्होंने ही चलाए हैं इससे ब्राह्मणों के बच्चे मार जावेंगे। सो जिस तरह से कि सब संसार के लोग भूले हूए है उसी तरह से यह ब्राह्मण भी भूले हुए हैं, सो यह बात काबिल ख्याल करने की है कि बगैर छल तो ब्राह्मण किस तरह से भूलें ! जिससे बनियों ने राक्षसी पाप से बुद्धि भ्रष्ट करके भुलाये हैं कि जैसे रावण ने तमाम जहान के राजा बादशाह और रैयत वगैरा की बुद्धि खराब करके भुलाय था; उसी तरह से इन बनियों ने भी बुद्धि खराब करके और ज्यादा पाप करके भुलाया है, क्योंकि इन बनियों ने तरह-2 के जाल करके भुलाया है और अनेक तरह का जाल चला दिया है, और केई किताबों में ऐसी-2 बातें पहले से लिख दी है कि देवता, जिन्दा स्वर्ग में बैठे हैं और यह किताबें बनियों की बनाई है और नाम उन किताबों में इन बनियों ने अपने बचाव के वास्ते और जाल अपना जाहिर न होने के लिए अगले भक्त लोगों के लिख दिए हैं। सो यह बात ख्याल करने के काबिल हैं कि देवतों ने अच्छे काम किए हैं जिससे उन्हों के नाम अमर हैं, और यह बनिये जादू से लोगों को बीमार कर देते हैं और उनके दिल में देवतों का सुझाते हैं जब उन्होंके हाथ से उन देवतों की समाधियों के उपर जीव मरवाते हैं, सो वोह समाधियों के उपर जीवड़ों को इस वजह से मारने लगे हैं और बनिये जादू से उन्होंके दिल में देवतों का सुझाते हैं कि देवतों ने बीमार किया है, और राजा रावण ने भी देवता सरुपी लोगों की बुद्धि भ्रष्ट कर दी थी; परन्तु रावण ने पाप थोड़ा चलाया था जिससे बु्द्धि थोड़ी भ्रष्ट हुई थी और इन बनियों ने तो साफ बुद्धि भ्रष्ट कर दी है कि जो बीमार तो जादू से करते हैं और उन्होंके घट में एसा सुझाते हैं कि देवता जीव माँगता है। सो जब देवतों के नामका जीव मारें जब तो बीमारी से अच्छा हो जाता है, सो जादू खोरा जब उसके नामका पाप छोड़ देवे तो वोह बीमारी से अच्छा हो जावे
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