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जगतहितकाऱणी
थी जब रावण भी कुछ का कुछ सुझाता था। सो तो संसार कुछ ख्याल नहीं करते थे और जिस तरह से कि शनिचर को रावण ने दुखी किया था, उसी तरह से इन बनियों ने राक्षसी पाप से मुझको दुखी किया है, इससे मैं आप लोगों को शनिचर की तरह से वाकिफ करता हूँ और लिखता हूँ कि यह बनिये जादू के जोर से मुर्दों को सुझाते हैं, इस वास्ते लिखने में आता है कि करोड़ों आदमियों को भूतों के और चुड़ेलों के बहाने से मारते हैं और किसी को देवताओं के बहाने से, और किसी-2 को किसी के बहाने से। सो न तो जन है और न भूत है और न पलीत वगैरा है, परन्तु जादू चाले से मार देते हैं और जो थोड़ा पाप जिस किसी के नाम का करावें वोह तो बीमारी पाता है कि जिसके नामका पाप कराते हैं; और जबकि पाप को छोड़ देवें तो फिर वोह बीमार, कि जो जादू से बीमार किया था अच्छा हो जाता है कि हमको फलाने साधु या फकीर ने बीमारी से बचा लिया, क्योंकि फकीर ने हाथ फेरके आराम कर दिया। सो अच्छा तो इससे हो गया कि बनियों ने उस बीमार के नामका पाप करना छोड़ दिया और फकीर को यह सुझा दिया कि तूं इस बीमार के उपर हाथ फेर जो आराम होगा; फिर फकीर ने हाथ फेर दिया, और बनिये जो बीमार के नामका पाप छोड़ दें तो वोह बीमार बच जावे; सो हाथ के फेरते ही आराम हो गया जब तो फकीर के परचे-2 दुनिया में करने लगे, और है बनियों का जाल। सो यह जब के देवतों के नाम से बीमारी करावें तो जब उनके नाम बकरा और पाड़ा वगैरा मारें और वहाँ पर फिर बीमार के नामका पाप छोड़ देवें तो बीमार अच्छा हो जावे तो फिर देवतों का परचा-2 करने को लग जावें, और चौरासी लाख कुण्डियाँ राघ लहू की बनाई है सो वहाँ पर ज्यादा पाप करें जब तो मर ही जावे और पाड़ा-बकरा मारने से भी नहीं बचें। सो ऐसे काम पर न तो किसी का झाड़ा चले और न परचा; और अमर तो कोई भी नहीं है, यह तो बनिये बलराजा के बाद से कच्ची उमर में मारने लगे हैं, क्योंकि पहले कोई कच्ची उमर में नहीं मरता था, सो कच्ची उमर में इस वास्ते मारते हैं कि सब दुनिया में थोड़े आदमी रह जावें तो हम बनियों की जात के ज्यादा रह जावें जब तमाम दुनिया में हमारा राज हो जावे, जबके राक्षस विद्या चलाते हैं जब ही कच्ची उमर में मरते हैं, नहीं तो परमेश्वर के घर में तो सबकी उमर पूरी है और पूरी उमर पाकर ही मरते थे; और जो बनियों के जाल से कच्ची उमर में मरने लगे हैं सो सब संसार के लोगों को दिखता है, और लगाए आदमी से और जीव जन्तु से कोई भी पूरी उमर नहीं पाते हैं और कच्ची उमर में मर जाते हैं, यह सब बनियों के जादू से मरते हैं कि रावण हरनाकुश वगैरा ने राक्षस विद्या के पाप से आदमियों को और जीवाजून को कच्ची उमर में मारना शुरु किया था और मारता था। सो रावण ने और हरनाकुश वगैरा ने भी भूत-पलीत के सर और जन और देवी-देवता वगैरा के सर बदनामी लगा दी थी और रावण वगैरा ने लोगों की बुद्धि भ्रष्ट कर दी थी जिससे संसार के लोग देवतों के उपर बकरा-पाड़ा वगैरा मारने लगे थे और उसका हाल दुनिया को मालूम नहीं था, इससे रावण के वक्त में भी रावण के पाप की वजह से कच्ची उमर में लोग और जीव जन्तु वगैरा मरते थे; और ईश्वर ने तो सबको ही पूरी उमर दी है, परन्तु कम उमर में जो मरे वोह कच्ची उमर में मरते हैं; सो जादू से मरते है। सो जबके कच्ची उमर में कोई किसम का जीव मरे तो जानना कि किसी ने राक्षसी पाप चलाया है और इस वक्त तो राक्षस विद्या का पाप प्रगट है, कि देवतों के उपर जानवर मारते हैं रावण की तरह से; सो जो किसी को यकीन नहीं हो, सो देख लो कि जिस मुलक में जानवरों को देवतों के उपर मारते हैं सो मराते तो जादू से बनिये और सुझाते हैं देवतों का। सो यह बनिये भी जादू से बीमार वगैरा करते हैं और बदनामी देवतों के सर पे लगा देते हैं और संसार के लोगों के घट में देवतों ही का सुझा देते हैं जिससे संसार के लोद बुद्धि भ्रष्ट होने के सबब से देवतों के उपर जानवरों को मारते हैं और यह काम जानवरों के मराने को देवतों के उपर बुद्धि भ्रष्ट करने के वास्ते चलाया है कि जिससे तमाम संसार की बुद्धि जादू से भ्रष्ट हो जावेगी, इस सबब से यह बनिये जादू से सुझाके बकरे-भैसें देवतों के उपर मराते हैं, और बनियों के जादू से कच्ची उमर मे हर किसम के जीव मरने का पाप सब विलायतों में फैलावेंगे कि जैसा आजकल हिन्दुस्तान में बलराजा के बाद से फैला हुआ है, इसी तरह से दूसरी विलायतों में फैला देंगे। सो जबके कोई राजा बादशाह 'दयावन्त' जागेगा कि जो देवतों के उपर जीव चढ़ाते हैं,
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