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जगतहितकाऱणी
वोह जीवड़ें उस तकलीफ से कुण्डियों में ऊँचे-नीचे तड़पते है, सो यह बेईमान ऐसा तो रावण के मुवाफिक संसार के नाम का पाप कराते हैं और शोभा चलादी है कि, स्वर्ग-नर्क में कुण्डियाँ नारगी डालने की है, सो तो सारी दुनिया भी शोभा कर रही है। सो इन सजाओं का कुछ पार नहीं है और जिसको कि, तुम हि्दु-मुसलमान स्वर्ग-नर्क कहते हो वोह बनियों के घर का रावण के मुवाफिक अलोप पाप है और स्वर्ग-नर्क तो यह जमीनमाता ही है और गुप्ती पाप से अनबोले जानवरों को मारते हैं, सो तुम हिन्दू-मुसलमान खुले दिल से बिखा ही कर रहे हो और गुप्ती पाप में तो अनबोले जानवर काम आते है और चौपाये और पंखेरू और जल के रहने वाले जानवरों के कुलों को दुख करके और कलपाके संसार के नाम से मारते हैं, सो उस स्वर्ग को तो तुम सारे संसार के लोग बिखानते हो और सुनते हो सो वोह तो बात छानी नहीं, सो तुम सभी लोग कहते हो कि वहाँ मालिक की दरगाह है, सो जहाँ कि मालिक की दरगाह में स्वर्ग-नर्क की कुण्डियाँ है सो मालिक नारगी डाल के सजा देता है, सो मालिक ने तो तुम, हम और जीवाजून और जमीन आसमान की इस तरह से रचना बनाई है कि, मालिक कहीं एख जगह थोड़ा ही बैठा है? वोह तो सब में व्यापक है और मालिक की रचना तो यहूं है, सो तुम, हम सभी देखते हैं सो अब तुम लोगों इस बात को गौर करके देखो और सोचना चाहिए कि जहाँ राध लहू की कुण्डियाँ हैं, सो वहीं तो जीवड़ों को मारते हैं जब राध खून होता है, सो इतनी बात तो आप सब संसार के लोगों को सोचना चाहिए क्योंकि, रावण ने राक्षसी पाप के स्वर्ग बनाके मालिक की दरगाह सुझाया था और सब संसार में राक्षसी पाप के स्वर्ग का बिखान चलाया था, सो रावण दुनिया से ऐसा थोड़ा ही कहता था कि मैंने राक्षसी पाप का स्वर्ग बनाया है वोह तो जादू से बुद्धि फेर कर ऐशा सुझाता था कि, मालिक की दरगाह है और मालिक की गदरगाह के किस्से गुप्ती पाप के चला दिए थे। सो यह बात सारे संसार में प्रगट है सो संसार के लोगों ने राक्षसी पाप का स्वर्ग तुड़वाया सो रावण को रावण की मय औलाद के दुख देकर तुड़वाया, जब संसार बचा है और जैसा कि रावण के पाप का बिखा संसार के लोग पहले ही कर रहे थे, उसी तरह से अब इन बनियों के राक्षसी पाप का बिखान और सोभा संसार के लोग कर रहे हैं, सो बिये कब कहेंगे कि हमने रावण के मुवाफिक राक्षसी पाप का स्वर्ग बाया है। सो बनियों ने रावण की तरह से बुद्धि फेरके ऐसा सुझाया है और सुझाते हैं कि राक्षसी पाप का जो स्वर्ग है वोह मालिक की दरगाह है, ऐसा सुझाते हैं और रावण की तरह से लाखों किस्से गुप्ती पाप के बनियों ने चला दिए हैं, सो दुनिया में शोभा हो रही है, सो इन बनियों का भी रावण की तरह से राक्षसी पाप का स्वर्ग तुड़वाओ जब, सब संसार की औलाद बचेगी और जो कि दुनिया में राक्षसी पाप फैल रहा है वोह सबको मालूम है परन्तु, भुलाए है बुद्धि फेर के, सिर्फ मालिक के भरोसे और संसार को यह भेद नहीं कि, बनियों ने ी रावण के मुवाफिक राक्षसी पाप से भुलाए हैं, सो यह भेद संसार को बनियों के कपट का नहीं है और चौरासी लाख जून को जो कलपाते हैं तो संसार के नाम का अलाहदार पाप कराते हैं और संसार भी कहता है कि चौरासी लाख जून भुगतनी पड़ती है, यह तो संसार के नाम का पाप कराते है और संसार में इनके नाम के किस्से चला दिए हैं कि, चौरासी लाख जून भुगतनी पड़ती है। सो जून तो मालिक ने बनाई है, सो तुम हम सबको ही दिखता है सो इस बात का किस्सा पूछने का भी काम नहीं, क्योंकि जो मालिक ने रचना बनाई है वह छानी नहीं है, सो यह तो सबकी कुलें और औलादें न्यारी-न्यारी दिखती है, सो जिस दिन से कि रचना इस जमीन माता के पेट में रची है, जिस दिन से आदमी की औलाद से तो आदमी याने आदमी के बीज से तो आदमी होता है और गाये-बैल की औलाद से गाये बैल होता है और भैंस-पाड़े की औलाद से भैंस-पाड़ा होता है और घोड़ा-घोड़ी की औलाद से घोड़ी-घोड़ा होता है और गेहूँ की औलाद से गेहूँ होता है और आम की औळाद से आम होता है, इसी तरह से लगाए झाड़ वनास्पति और लगाए आदमियों और अनबोला सब अपी-2 औद से पैदा होते है, सो तुम हम सबको हि दिखता है, सो सबकी कुलें और जात न्यारी-2 है, सो बनियें चौरासी लाख कुण्डियों के उपर चौरासी लाख जीवाजून को संसार के नाम से कलपाते हैं
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