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जगतहितकाऱणी
या दुनिया में रोग होने का सुपना करें और जहाँ मरी पड़ने का सुझावें और जहाँ यह सुझावें कि अब के बरस में तलवार चलेगी या किसी का राज डूबेगा। सो जिसका बनियों को राज डूबोना होवे या किसी का बुरा करना होवे, सो यह बनिये मरे हुओं के जंजाल करके कई राज डूबो देते हैं और तमाम जहान को भूल ही भूल पड़ाके डूबोवेंगे; और जो कि संसार में यह कहते हैं कि शंकराचार्यजी भौंरा बना था, सो आदमी से किस तरह से भोंरा बन गया होगा? और किस तरह से भोंरा बनके बलराजा के झारी की टूटी में घुसकर बैठ गया होगा? परन्तु संसार की बुद्धि जादू से भ्रष्ट कर दी है इससे जानते हैं कि सच भोंरा ही हुआ होगा, और यह कहते हैं कि अजेपाल जोगी अब तक जिन्दा है और किसी-2 को दर्शन देता है, सो जब किसी-किसी को अजेपाल जोगी के नामका पाप कराते हैं जब बनियों के घरका राक्षसी पाप की जिसको सुपना किया होवे उसको अजेपाल का चहरा होकर सुझता है, सो वोह जागता सुपना है, सो जब किसी को जागता सुपना करके सुझा देवें जब वोह दुिया में बातें करता है कि हमको अजेपाल जोगी मिला, सो न तो उनको खबर कि जिसने अजेपाल जोगी को जाकते सुपने में देखा सो उनको यह भी खबर नहीं कि यह जागता सुपना है और न दुनिया में बात के सुनने वालों को यह खबर कि यह जागता सुपना है बलके वोह जागते सुपने को करामात-2 करते हैं और अनेक भक्त हुए हैं जिनका भी चहरा राक्षसी पाप के जुलम से सुझा देवें, जब दुनिया कहती है कि देवी-देवता चेतन है और परचा वाले हैं, जब दुनिया को दर्शन देते हैं और दुनिया में यह नहीं समझते हैं कि जैसे नींद में सुपना राक्षसी पाप के जुलम से कराते हैं वैसे ही यह जागता सुपना है। सो यह सब इन्द्रजाल है और यह जाल बनियों ने चलाया हैं और इन्द्रजाल का जो गुण है वो सब बुरा ही है, सो गुप्ती पाप से तो हमेशा ही बुरा होता है और राजा बादशाह और चोर-चण्डाल और साधु-संत, पण्डित-फकीर और गरीब-गुरबा होवे तो वोह भी यह काम करना नहीं चातहे हैं क्यंकि पापों से तो बुरा होता है और खेती-बाड़ी का पाप और राजा बादशाह के पाप से और चोर-चण्डाल के पाप से इन्द्रजाल का पाप ज्यादा है और इन्द्रजाल में तो लाखों आदमी गुप्ती पाप करते हैं सो वोह तो संसार में अलोप है और जो कि चौरासी लाख कुण्डियाँ हैं और संसार में स्वर्ग-नर्क कहते हैं वोह रावण की तरह से बनियों ने गुप्ती पाप का स्वर्ग-नर्क किया है, वोह प्रगट नहीं है। सो खेती-पाती के काम का भी पाप जबसे चला है जबसे बनिये काल पड़ाने लगे हैं और चोर चण्डाल भी जबसे हुए है कि जबसे इन बनियों ने इन्द्रजाल का पाप चलाया है और जबसे ही बनियों ने धन को काबू में कर लिया है जबसे भूखे मरते हैं, इससे चोर-चण्डाल चोरी करते हैं और आगे काल वगैरा नहीं पड़ता था। जब धान वगैरा बगैर बोए हुए के भी बहुत होता था और ध भी हर एक के घर में बहुत था कि जब चोर चण्डालपना बिलकुल हीं करते थे और परमेश्वर के ध्यान में रहते थे, परन्तु दनिया देवकला के भरोसे भुली हुई है कि जैसे रावण ने भुलाए थे परन्तु इन बनियों ने तो ज्यादा भुलाया है, सो यह सब जादू खोरों का प्रताप हैं और गुप्ती पाप से सपुने होते हैं और मरी पड़ती है और दुःख भी करते हैं; लेकिन यह खबर नहीं है कि, एक-2 के नाम से बुरी तरह से जीवड़े मराते हैं जिसका कुछ अंदाजा नहीं और दुनिया में यह जो कहते है कि, मालिक नारगी में डालता है। सो जिसको कि चौरासी लाख कुण्डियाँ कहते हैं और यह कहते हैं कि, कीलों की मार देते है और पबहुत से यह कहते हैं कि, गुरजों की मार देते हैं और बहुत से यह कहते हैं कि, चमड़ों की मार देते है और चमड़ों को उतारते हैं और यह कहते हैं कि, गरम थम्बों से बाँधकर मारते हैं और बहुत से यह कहते हैं कि, स्वर्ग-नर्क में अर्क निकालते हैं और खून उतार देते हैं और बहुत से यह कहते हैं कि, कुण्डियों के नीचे जाते हैं जब तो कीड़े खाते है और जबकि बाहिर आवे जब कागले और चीलें चोचें मारती है, और बहुत से यह कहते हैं कि, वहाँ पर लहू की कुण्डियाँ है और राध की कुण्डियाँ है, सो उन कुण्डियों पर ऐसा पाप होता है कि, पहले तो जीवड़ों के शस्त्रों से चोट देते हैं जब उन शस्त्रों की जरब से खून निकलता है और जख्म होते हैं और फिर उन जख्मों में कीड़े पड़ जाते हैं, जब वोह कीड़े उन जीवड़ों को खाते हैं तो फिर उनको दर्द बहुत होता है; जब
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