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जगतहितकाऱणी
बिये इस गर्ज से लोगों के दिल में सुझाते है कि जो बाजीगर और कारबेलिया और संसार के लोग सीखते हैं, सो यह बनियों ने सभों को मराने के वास्ते अकल की है कि जब कोई करेगा तो यह जानेंगे कि जादू तो यह करते हैं जिससे जादू चलता है, क्योंकि वोह संसार को दिखा के करते हैं जिससे वहीं पकड़े जावेंगे; सो यह संसार को तो खबर नहीं है कि हमारे मुवाफिक यह भी जादू में कैद है, सो यह तो बिलकुल ख्याल नहीं करते कि बेचारे भूल में मारे जावेंगे क्योंकि इन्हों से जादू नहीं चलता, वोह तो बियों का अलोप पाप हो रहा है क्योंकि 'गुप्ती पाप के कराने में हजारों रुपया खरच होता है' जब राक्षसी पाप चलता है और जो कि दुनिया में तमाशा दिखाते हैं उनको बनियों के भेद की खबर नहीं है; अगरचे खबर होवे कि बनियों ने हमारे बच्चे मराने को यहा राक्षसी पाप चलाया है कि जिसको हमने खेल समझ के सीखा है, अगर यह मालूम होवे कि यह बनियों का जादू है तो कभी तमाशा वगैरा नहीं करें और ना करा सीखें और ना किसी को दिखावें, क्योंकि वोह तो बेचारे भूत-पलीत और देवताओं के बहाने से भूले हुए है; क्योंकि राक्षसी पाप के करने वाले बनिये चोड़े नहीं आते है, इससे संसार के उपर और सभों के उपर इ बियों के राक्षसी पाप का साया पड़ा है, इससे सभों की अकल फिरी हुई है जिससे यह बनिये अपने जादू से लोगों की बुद्धि फेरक़े और उन बाजीगरों को मराने के वास्ते ऐसा जादू करवाते हैं, और जब इन बियों को अपे कुल के आदमियों को राज कराना होवे तो राजा बादशाह को मार देते हैं; और जिस घोड़े के उपर या जिस सवारी के उपर राजा बादशाह सैर करने को या शिकार खेलने को गया होवे तो उशको वहाँ पे मार देते है, और उसी अपने कुल के आदमी को उसकी सवारी पर बनिये राजा बादशाह की शिकल बकर वापिस घर आता है और राजा बादशाह की तरह से ही सब काम करता है, जिससे कुछ मालूम हीं होता है और वोह राज करता रहता है। इस बात को तुम संसार के लोग सच-2 जाना और इस तरह से ख्याल न करना कि इस किताब में ऐसी बेहूदा बातें क्यों लिखवाई है, कि जैसे कोई लड़का नादा, बावला और बेवकूफ बातें करता है, इस तरह से यह बातें लिखवाई है; पर्तु गरीब की हाथ जोड़कर अरज है कि जो मैंने इ बियों के जाल की बातें अपनी जबान से किताब में बोल-बोल के लिखवाई है वोह दुरस्त और सही जाता हूँ और तुम भी दुरस्त और सही जानों और बावला और अहमक और नादान और बेवकूफ और गैले बच्चों की सी बातों पर ख्याल मत लाओ, क्योंकि मैं बियों के राक्षसी पाप में कैद हो रहा हूँ और तुमको इ बियों का राक्षसी पाप मालूम हीं है। जिस वक्त में रावण ने जाल चलाया था तब सीता व रामचंद्रजी को धोखा दिया, याे जादू से भेष बदल के हिरण हुआ और रामचंद्रजी ऐसा हीं जाते थे कि रावण ही था; असल में रावण ही था, पर्तु जादू के जोर से हिरण मालूम हुआ, यह तो शिचरजी महाराज ने वाकिफ किया।
अगर वोह बात दुरस्त है तो यह भी सही समझा, तम लोग मुझको बावला व गैला वगैरा जानोगे, क्योंकि इन बनियों ने मुझको अपने राक्षसी पाप से अगले देवतों के चहरे, कि जो भक्त हो-हो के मर गए हैं उनके चहरे दिखाए है क्योंकि जब कहीं का राजा बादशा किसी मुलक में आता है तो गरीब का चहेरा सुझा देते हैं कि कोई गरीब किसी मुलक का आया है और जब कोई गरीब किसी मुलक का आथा है तो जादू से जोर से राजा बादशाह का चहेरा सुझा देते हैं कि राजा बादशाह किसी मुलक का आया है। सो इन बनियों के करतूतों को मैंने अच्छी तरह से देख लिया है और देखता हूँ कि यह बनिये बेईमान अपने राक्षसी पाप की वजह से हर एक का चहरा सुझा देते है, पर्तु मैं ऐसा गैला नहीं हूँ यह तो बनियों का जादू है सो कुछ का कुछ सूझा देते हैं; क्योंकि ''मैं अपने उपर बीती हुई लिखता हूँ सो इसमें बिलकुल झूठ नहीं'', इसमें झूठ होवे तो तुम संसार के लोग मुझसे कहो, कि जिसको तुम 14वी या 16वीं विद्या कहते हो वोह क्या चीज है? सो वोह कहीं पर सुनी होगी और किसी-2 किताबों में और पुस्तकों में लिखी होगी। सो तुम कहते हो
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