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जगतहितकाऱणी
राक्षसी पाप के जुलम से कैद कर दी है कियोंकि यह बनिये बेईमान ऐसा करते हैं कि जिसका राज डूबोना होता है तो पहले अपने राक्षसी पाप के जुलम से उस राजा बादशाह, कि जो राज गादी पर बैठा होवे उसकी बुद्धि भ्रष्ट कर देते हैं। जब वोह राजा बादशाह दुनिया में इन्साफ नहीं करते हैं बलके जुलम करने को लग जाते हैं और जिसकी बुद्धि भ्रष्ट नहीं करें और राज खोना होवें तो उसको मार देते हैं। जब यह बनिये अपने कुल में से सलाह करके अपने कुल का आदमी उस राजगादी पर बैठा देते हैं, कि जिसको मार देते हैं, अगरचे वोह भी जुलम करने को लग जावे कि जो बनियों ने अपने कुळ का बैठाया होवे तो बदनामी राजा बादशाहों के कुल को ही देते है, तो बदनामी भी उनको ही लगती है; और जबकि ‘राज डूबा तो कुल डूबा और औलाद डूबी जिनका कि राज होवे,’ अगर यह बनिये अपने राक्षसी पाप से नजर बंद कर देते हैं कि जब तक वोह राज का करने वाला बनिया जिन्दा रहवे, और जो कि राजा बादशाह मर जाते हैं जब यह बनिये अपने कुल औलाद के आदमी उस राजा बादशाह की जगह पर, कि जो राजा बादशाह मर गया, राज करने को बैठा देते है और वोह राज करता है तो वोह राज का करने वाला बनिया कि जो राज गादी पर राज करने के वास्ते बैठा वोह राजा बादशाह की औरतों को और उनकी औलाद वगैरा को उसकी सूरत जादू के जोर से राक्षसी पाप के करने वाले बनिये हूबहू वैसी ही दिखा देते है, कि जिस शिकल का राजा बादशाह मार देते हैं और वैसी ही शिकल और सूरत, मय कान और नाक वगैरा के अपने जादू के जोर से दिखा देते हैं चाहे उसकी रानी हो या माँ हो, परन्तु पहले उनकी नजरों को राक्षसी पाप के जुलम से बंद कर देते हैं कि जो उस राजा की रैयत और कुल के आदमी वगैरा और अहलकार वगैरा होते हैं उनकी नजर बंद कर देते है; जब उनको ऐसा ही सुझता है कि राज का धनी यह है, परन्तु उनको यह बात मालूम नहीं होती है कि हमारा धनी मारा गया और यह दूसरा छल करके र ही धनी आया है, सो मालूम नहीं होता है; क्योंकि जब नजरबंद हो जाती है जब कुछ मालूम नहीं होता है। और अलावा इसके ऐसा भी कर देते है कि जो राजा बादशाह को नहीं मारे तो उसकी राक्षसी पाप से बुद्धि भ्रष्ट कर देते हैं इससे वोह जुलम करने को लग जाते हैं और राज को डूबो देते हैं और जब के जुलम करते हुए देखते हैं तो दूसरे राज को ले लेते हैं, जब वोह आप ही आप डूब गया। सो इन बनियों के ऐसे-ऐसे जाल है, क्योंकि जब बाजीगर तमाशा करते हैं तो ‘तमाशागिर’ जमे होते जाते हैं, तो उस वक्त सबकी नजरबंद हो जाती है तो उनको बजीगर अपने तमाशों से तरह-2 के रखत फलदार और रुपया पैसा वगैरा दिखा देते हैं; सो सब लोग देखते है और सब कहते हैं कि बाजीगरों का जादू है। सो इस बात की खबर तो दुिया को अच्छी तरह से मालू्म है परन्तु यह जादू भी बनियों के राक्षसी पाप से होता है, क्योंकि जब बनिये राक्षसी पाप को करते हैं जब बाजीगरों का जादू चलता है, परन्तु बाजीगरों को मालूम भी नहीं है वोह तो यह जानते हैं कि हमने किसी देवता को बस में किया है, जिससे हमारा जादू चलता है परन्तु सब काम का होा बनियों के राक्षसी पाप से है, परन्तु बाजीगर ऐसे भूल गए हैं कि जो भूत पलीत और देवतों के निसबत कहते हैं कि हमने बस में कर लिया है, जिससे जादू चलता है, सो सब गलत बात है, क्योंकि जिस तरह से रावण ने ‘तीन लोक’ की बुद्धि बस में कर ली थी, उशी तरह से इन बनियों ने भी तीन लोक की बुद्धि बस में कर ली है परन्तु बुद्धि राक्षसी पाप की वजह से बस में की है कि जिसको तुम स्वर्ग और नर्क कहते हो वोह बनियों के घर का राक्षसी पाप है; परनतु उसी राक्षसी पाप से बस में कर ली है, कि जो 'बाजीगर' और 'कारबेलिया' कि जो कोई संसार में जादू को सीख के सिखाता है और एक-2 के पास से सीखते हैं। सो यह रस्ता बनियों ने पहले से चला दिया है, सो सुन-2 के और देख-2 के करने को लग जाते हैं और फिर उनके घट में देवतों और भूतों का सुझा देते हैं जिससे वोह बाजीगर वगैरा यह जानते है कि हमने देवता को और भूत-पलीत को बस में किया है जिससे हमारी करामात चलती है, और जो कि भूत-पलीत सुझाते है वोह बनियों का गुप्ती पाप है, कि जिसको दुनिया स्वर्गृ-नर्क कहती हैं और चौरासी लाख कुण्डियाँ राध लहू की बताते हैं वोह बनियों के घर का अलोप पाप है। सो यह
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