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जगतहितकाऱणी
अगर मैं पढ़ा हुआ होता तो ज्यादा बातें याद होती। अब तुम सब हिन्दु-मुसलमान पढ़े हुए हो, सो ख्याल करके इस बात को समझो कि “जो मैंने अपने अहलकार से बोल-2 के लिखवाया है उसको जरुर पञ़ना, और जब तक कि मुझको बनियों ने नहीं दुखी किया था, जब तक तो मैं भी संसार की तरह से अंधा था और यह जानता था कि अगले लोग करामाती है और जबसे मुझे बनियों ने जादू से दुखी किया है” जब इनहों का जाल मुझको भी मालूम पड़ा है; क्योंकि जो किताबें हिन्दू-मुसलमान के जात की है और उनमें हिन्दू-मुसलमान के नाम लिखे हुए हैं, सो बनियों ने अपनी अकलमंदी से लिख दिए है कि जब राजा बादशाह दुसरी विलायत के इन सौदागरांन के फरेब में आकर हिन्दुस्तान के बच्चों को गारत करने के लिए आवेंगे और जब हिन्दू-मुसलमानों की किताबों को देखेंगे जब यह जानेंगे कि राक्षसी पाप हिन्दुस्तान के राजा बादशाहों और साधु-फकीरों का है, क्योंकि हिन्दू-मुसलमान किताबों को पढ़ते हैं और यह समझते हैं कि हम करामाती है और जो कि भूल ही भूल के अन्दर दूसरी विलायत के लोग इन सौदागरांन के जाल में आकर हिन्दुस्तान में आवेंगे और किताबों को देखेंगे और यह मालूम करेंगे कि जाल हिन्दू-मुसलमानों का है, जब हिन्दू-मुसलमान वगैरा मारे जावेंगे और बनिये अलाहदा के अलाहदा रह जावेंगे। परन्तु इन सौदागर बच्चों ने राक्षसी पाप के जादू से ऐसी अकल फेर देते हैं जिससे हिन्दुस्तान के लोगों को करामात ही नजर आती है परन्तु यह बनिये अपने राक्षसी पाप के जुलम से तरह-2 की चीजें बनाते है और दिखाते हैं कि जो हम और तुम अच्छी तरह से जानते हैं, कि मरे हुए फिर नहीं आते है; परन्तु यह बनिये अपने जादू के जुलम से मुर्दों को दिखा देते है, सो मुर्दे तो नहीं ईते है परन्तु जो लोग कि भक्त हो गुजरे हैं, उनके नाम का राक्षसी पाप कराते है, जब वोह पाप से उन भक्त लोगों की शिकलें दिखती है, परन्तु जब हिन्दू लोग हिंगलाज में जाते हैं और आते है तो उन्हों में से कि जो भक्त होता है उसको हिंगलाजजी की सूरत, अपने जादू के जोर से यह बनिये दिखा देते हैं। परन्तु वोह दर्शन करने वाले अपने देश में वापिस आते हैं तो संसार के लोगों से कहते हैं कि हिंगलाज देवी का बड़ा भारी परचा है और मैंने आँखों से देखा है; जब संसार के लोग अपनी जुबान से यह कहते हैं कि जो बड़ा भक्त होता है उसको हिंगलजजी के दर्शन होते हैं, और सिवाय इसके हिंगलाजजी में कालका देवी की पूजा है, सो वहाँ भी लोग दर्शन को जाते है और कालका देवी पर बकरे का खून डालते है। सो जबकि खून जमीन उपर गिर जाता है, जब तो यह कहते हैं कि देवी राजी नहीं हुई है अगरचे खून को देवी के उपर डाला और वोह खून उड़ गया तो उसको परचा कहते हैं, कि देवी खूब राजी हो गई है, क्योंकि देवी ने मीन लिया है और देवी सच्ची है। सो देखो भाई, संसार परचों के भरोसे भुला हुआ है कि न तो देवी ने खून उड़ाया और ना पिया, वोह तो सौदागर बच्चों के राक्षसी पाप का जादू है कि जो खून वगैरा दर्शन करने वालों को उड़ा हुआ मालूम होता है, उसी तरह से मक्का-मदीना के मुसलमानों में भी बड़ा भारी पीर और दर्शन की जगह गिनी जाती है; सो मुसलमान उसके दर्शन करने को जाते है सो मुसलमानों की तो बादशाही जात है। सो देखो भाई, इनको भी भुला दिया है क्योंकि जब जाते हैं तो उस वक्त दर्शन करने वालों को ऊँटनी के दर्शन जादू के जोर से सुझा देते है जब वोह यह जानते हैं कि हमारे उपर पीर-फकीर बहुत राजी हैं, इससे हमको दर्शन हो गए हैं और हिंगलाज के रास्ते पर चन्द्रकुप स्वामी है, सो वहाँ पर जमीन माता को जादू के जोर से रोग किया है, कि जैसे आदमी के शरीर में रोग की वजह से नासूर हो जाता है और राध पड़ के गोस्त गल जाता है और राध बाहिर को आता है, उसी तरह से इन बनियों ने जमीन माता को रोग किया है। सो जबकि सब लोग जाते है जब यह कहते हैं कि चन्द्रकुप स्वामीजी दर्शन दे और बोल, सो जिस वक्त कि आदमी अर्ज करते हैं तो सुराख में से राध बाहिर को बबकता है, जब यह जानते हैं कि चन्द्रकुप स्वामी ने दर्शन हमको दिए; सो यह हमको खबर नहीं कि वोह नासूर बेरे जितना है यै बावड़ी जितना है या कम ज्यादा है, सो ऐसे-2 रोग सैकड़ों कर दिए
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