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जगतहितकाऱणी
तो इन्होंने संसार में बहकाने के वास्ते बातें चलादी है, असल में तेरह हिस्सा धन है, सो (12) हिस्सा तो इन बनियों के पास ही अलोप है और एक हिस्सा जो दुनिया में है वोह एक नाम के वास्ते है, नहीं तो वोह तेरहवां हिस्सा भी इनके पास है, नहीं तो वोह तेरहवां हिस्सा भी इनके पास है। दूसरे राजा बादशाह के पास तो एक थोड़ा-सा है तो वोह एक हिस्से का धन कुल विलायतों के खरच के वास्ते जाहरात में है, कि उस धन को तमाम जहान के लोग खरच करके परवरिश पाते है, सो इन सौदागरांन ने उस खरच के तुंबा को भी अपने कब्जे में कर रखा है और यह सोचने की बात है कि बारह हिस्सा धन जो जमीन के अन्दर अलोप बताते है, सो वोह जमीन में किसने गाड़ा है ? अगर अपन हिन्दू-मुसलमान के बुजरर्गों ने वोह बारह हिस्सा धन जमीन में गाड़ा होता, तो अपन हिन्दू-मुसलमानों को उसका पता मालूम होता और हिन्दू-मुसलमान के बुजर्ग अपनी-2 औलादों को जरुर पता बता देते कि फलानी जगह जमीन के अन्दर धन हमने गाड़ा है। सो यह तो सब चालें इन बनियों की है कि वोह बारह हिस्सा धन जमीन में अलोप कर रक्खा है तो इनको ही उसका पता मालूम है, जो हिन्दू-मुसलमान के बुजर्गों ने गाड़ा होता तो वोह मरते वक्त अपनी औलाद को उस धन का पता बता देते, तो इस व्स्ते इन बनियों के बुजर्गों में इस बात का भेद है, सो जैसे वोह मरते जाते है तो अपनी औलादों को भेद और पता धन का बताते जाते हैं, परन्तु अपना राक्षसी पाप जाहिर न होने देने की वजह से इन बनियों ने खरच के हिस्से के अन्दर से किसी कदर धन हर एक विलायत के अन्दर खरच के वास्ते छोड़ दिया है, बाकी बारह हिस्सा धन को अपने कब्जे में कर लिया है। इससे मेरा लिखना यह है कि यह जितनी बातें दुनिया में जाल की हो रही है यह सबब बनियों के राक्षसी पाप का है, क्योंकि संसार के लोगों की अकल इन सौदागरांन ने अपने राक्षसी पाप से खराब कर दी है कि जिससे बनियों के जाल की पहचान नहीं कर सकते हैं, बलके भूले हुए और बहके हुए है और ख्याल में नहीं लागते है कि इस जमीन के उपर तो इस कदर धन था कि जिसका कुछ अंदाज भी नहीं हो सकता था और सोने-चाँदी का ठाट और पाट था, सो वोह धन कहाँ गया?सो इतना तो कोई भी साहब ख्याल नहीं करते हैं, सो यह भी किताबों से सा-2 साबित होता है कि सोने का ठाट और पाट था और अब नहीं है, जिसकी वजह यह है कि इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से लोगो की अकल खराब करके कुल माल और मता संसार का अफने कब्जे में कर लिया है और जो कि धन थोड़ा-सा टूटा हुआ संसार के खरच के लिए राक्षसी पाप जाहिर न होने के सबब से छोड़ रखा है, उसको होले-2 आपस में संसार के लोगों को लड़ाके ले लेवेंगे और सबको निरधन कर देंगे और दूसरी विलायत के लोगों को यह बनिये बलराजा के बाद से लाने लगे है। अव्वल तो मक्का वालों को लाए और मक्का वालों के हाथों से इन बनियों ने खुद अलाहदा रहकर हिन्दुस्तान के आदमियों को मरवाया, पर्तु यह ख्याल मक्का वालों ने भी नहींकिया कि हिन्दुस्तान के हिन्दू-मुसलमान इन बनियों का इस कदर लाड़ रखते है और इन लोगों को हमारे हाथों से क्यं मरवाते है? सो इसकी वजह तो इन बनियों से दरियाफ्त करें कि कहीं बनियों के घर में आदू तो नहीं है! परन्तु इन बातों का ख्याल तो बिलकुल नहीं किया, जिसकी वजह यह है कि जिस विलायत के राजा बादशाह को हिन्दुस्तान में लाते है, तो पहले उनकी अखल अपने जादू के जुलम से भ्रष्ट कर देते हैं जिससे वोह आने वाले विलायत के लोग कुछ नहीं सोच सकते है और सो सोचें भी तो, राक्षसी पाप के सबब से उन्हों को फिर उल्टा ही सुझता है। परनत्ु यह बनिये विलायत के आने वाले शख्सों की बुद्धि इस गर्ज से खराब कर देते है कि जब उनकी अकल खराब होगी तो हिन्दू-मुसलमानों के लोगों को आपस में लड़ा करके मार देंगे और वोह खुद ही बुद्धि भ्रष्ट होने के सबब से मर जावेंगे। सो ऐसी-2 अखलमंदी इन बनियों ने इस वजह से चला रक्खी है कि जब यह दूसरी विलायत के शख्स हमारे मुलक में राज करने के वास्ते हमारे कहने से आवेंगे, तो अव्वल तो हमारे कहने को मानेंगे, दूसरा हम अपने राक्षसी पाप से उनकी विलायत का धन अपने कब्जे में कर लेंगे, चुनाचे मक्का वालों का धन राक्षसी पाप के जादू से इन बनियों ने हिन्दुस्तान का राज थोड़े-से बरस कराके
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