वक्त में कोई शख्स खानों वगैरा को नहीं भुला था, उसी तरह से इन बनियों के राक्षसी पाप के चलाने से मत भुलो और खानों की पहचान रखो, कि जैसे पहले जमाने के लोगों ने पहचान रक्खी थी, सो अगर तुम लोग भी उसी तरह से पहचान रखोगे और भुलोगे नहीं और पाप के छोड़ाने की कोशिश करके पापको छोड़ाओगे तो खानें प्रगट हो जावेगी, और जिस तरह से कि खानें आजकल अलोप हो गई है इस तरह से नहीं रहेगी; परन्तु यह बात काबिल ख्याल करने के है कि जैसे आजकल पत्थर-मिट्टी की खानें जमीन पर मौजूद है, इसी तरह से चाँदी-सोने की खानें बलराजा के जमाने तक मौजूद थी, परन्तु जबसे कि इन बनियों ने राक्षसी पाप चलाया है, जबसे ही खानें अलोप हो गई है और बीमारी के सबब से गल गई है। जिसकी वजह यह है कि इन बनियों ने जमीन के नामका पाप कराना शुरु किया है, जिससे जमीन के शरीर की चरबी गल गई है और खानों के अलोप होने का यही सबब है। अगर आज पाप का करना सौदागर बच्चे छोड़ देवे तो रफते-2 बदस्तूर खानें चाँदी-सोने की, पत्थर वगैरा की खानों की तरह से मौजूद हो जावे और जो कि मिट्टी-पत्थर की खानें तुम लोगों को दिखती है, सो इससे दिखती है कि इन खानों के नाम से पाप नहीं कराते हैं, अगरचे इन खानों के नाम से भी पाप कराते तो पहाड़ वगैरा की खानें भी गायब हो जाती, परन्तु इन खानों के नाम से पाप नहीं कराते हैं, नहीं तो यह भी जादू से खाक हो जाती; परन्तु इन बनियों ने ऐसी अकल खराब कर दी है कि खानों को भी भूले हुए है, जिससे यह बनिये तुमको भुलाके और धन को खेंच-2 के अपने कब्जे में किया चाहते है, तो पहले राक्षसी पाप के जोर जमीन को फाड़ते है और जबकि जमीन फट जाती है जब धन को खेंच लेते हैं, जब जमीन कापंती है। सो यह बनिये कुल विलायतों का धन अपने राक्षसी पाप से खेंच रहे हैं और जिनका कि खेंच लिया है उस विलायत में संसार के देखने के लिए थोड़ा-सा धन रहने दिया है; इसी तरह से कुल विलायतों में थोड़ा-सा धन रहने दिया है; इसी तरह से कुल विलायतों में थोड़ा-सा धन रहने देंगे। सो उस थोड़े से धन को सौदागरी के जरिए से खेंच लेंगे, गर्ज कि जब कुल विलायतों का धन अपने कब्जे में कर लेंगे जब अपना राज करेंगे, और अलावा इसके यह बात भी ख्याल करने के लायक है कि कुल जहान में यह बात मशहूर है, कि यह बनिये अपने राक्षसी पाप से कुल विलायतों का माल व मता कि जो असली है उसको खेंच लेते है और हर एक विलायत में थोड़ा-2 रहने देते है। सो यह बात भी दुनिया में मशहूर है कि जिस कदर धन हिन्दुस्तान में और दूसरी विलायतों में असली है, वोह सब लोगों के खरच के वास्ते है, परन्तु इन सौदागरांन ने अपनी अकलमंदी से संसार में यह जाहिर कर रक्खा है कि एक हिस्से का धन तो कुल संसार के लोगों के वास्ते है और (12) हिस्सा का धन जमीन के अन्दर गड़ा है, परन्तु कुल धन मिलके (13) हिस्सा था परन्तु यह (13) हिस्सा धन को (13) तुंबा भी कहते हैं, सो यह (13) तुंबा धन टूटा हूआ है; सो यह टूटा हुआ धन भी कदीम से है, परन्तु इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से भुला करके अपने कब्जे में कर लिया है और जो कुछ कि, धन उस खरच के हिस्से में से बाकी रहा है, उसको अपने राक्षसी पाप के जादू से खेंच कर अपने कब्जे में कर लेंगे; परन्तु इन बनियों ने अपनी अकलमंदी से राक्षसी पाप से सबकी अकलों को फेर करके यह कैसा जाहिर किया है कि कुल 13 हिस्सा धन था जिसमें से एक हिस्सा धन तो तमाम पृथ्वी के लोगों के खरचे के लिए है और जो कि 12 हिस्सा घधन है वोह जमीन में गड़ा हुआ है। सो मेरे भाइयों, इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से अकल फेरके भुला रखा है,कि कुल 13 हिस्सा धन है जिसमें यहीं एक हिस्सा धन जाहिर किया है और 12 हिस्सा धन अलोप जमीन के अन्दर रखा है। सो भाई मेरे हो, धन तो इस जमीन के उपर बहुत था कि जिसकी कुछ हद भी नहीं थी, परन्तु तेरह हिस्सा धन दुनिया के भुलाने के वास्ते किताबों में लिख करके जाहिर किया है कि कुल तेरह तुंबा धन था और तेरह तुंबा |