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जगतहितकाऱणी
सो आप संसार के लोगों समझो कि तुम्हारे बड़े बुड्ढे उस शख्स को, जो राक्षस विद्या के जाल को प्रगट करें तो उसको कैसा समझते थे ? और “अगले लोग तो कुत्ते का भी गुण मानते थे” और मैं जो “इन महाजनांन का जाल संसार को सुझा रहा हूँ तो मुझको लोग पागल और खबती कहते है।” अगले लोग तो जाल प्रगट करने वाले को जीवदान देने वाले के मुवाफिक समझते थे, सो एसी बात तो मैं अपने निसबत नहीं कहलाता हूँ कि संसार मुझको पर-उपकारी कहो या समझो और ना अपने कलम से लिखता हूँ और ना मैं अपने को किसी लायक समझता हूँ, परन्तु मेरे को ऐसी-2 बातें भी तो मत कहो कि सिरड़ी और पागल और इसको वहम हो गया है, सो संसार को तो कुछ देष नहीं, उनको तो राक्षसी पाप से ऐसा ही यह महाजन सुझाते है, जब संसार को तो कुछ दोष नहीं, उनको तो राक्षसी पाप से ऐसा ही यह महाजन सुझाते है, जब संसार तो कहता है; सो जिसका हाल वेद शास्त्र से तमाम जहान के लोगों को मालूम हो सकता है कि राक्षसों की चोरी पकड़ने वालों का कितना ‘कुरब’ है, “मैं अपनी जबान से इस नाचीज बात को अपने ‘हैड क्लर्क’ से क्या लिखाऊँ, क्योंकि जिन शख्सों ने राक्षसी पाप की चोरी को पकड़ के जाहिर किया है और फौजें मरी हैं जिन्हों का हाल किताबों में लिखा हुआ है कि लंका पर ‘अठारह पदम फौज’ रामचंद्रजी के जमाने में रावण का जाल छोड़ाने के वास्ते चढ़ी थी जब रावण का जाल छोड़ाया था।” उसी तरह से इन बनियों के राक्षसी पाप का बन्दोबस्त कराया जावे और बाद बन्दोबस्त होने के इन बनियों का जाल दफे किया जावेगा, और “मैं इस जाल को दफे कराने के लिए सन् (1881) से कोशिश कर रहा हूँ जो जबसे कोशिश करते-2 करते चन्द रियासतों को तो समझा करके अपने कब्जे में कर लिया है और वाकिफ कर दिया है,” इसी तरह से कुल रियासतों के लोगों को वाकिफ किया जावे जब यह काम पार जावेगा, क्योंकि इन सौदागरांन ने ऐसी अकल खराब की है कि समझाए से भी नहीं समझते हैं बलके इन सौदागरांन की सी ही कहने को लग जाते हैं कि सरासर बनियों के परचे जाली चल रहे हैं उनको सच्चा जानते हैं और कुदरत-2 बयान करते हैं, इससे मैं अफसोस के साथ आप लोगों की कम अकली को बनियों के राक्षसी पाप को पहले से लिख के जाहिर करता हूँ ताकि लोगों को इस अपनी कमअकली पर ख्याल होवे, बलके अपनी अकलों को असली हालत पर लाके और इन सौदागरांन के जालों को मुझसे और मेरे हैड क्लर्क से समझ के और यकीन लाकर सब संसार के राजा बादशाह व रैयत दिल से अपनी-2 औलादों को प्यारा समझ के इन बनियों के जालों को दफे करने के लिए बन्दोबस्त करो, क्योंकि यह तमाम संसार के लोगों की हिम्मत से इनज़ांम को पहुँचेगा कि जिस तरह से रावण के वक्त में शनिचर के कहने से कुल संसार के लोगों ने कमर, हिम्मत की बाँधी और फौजे वगैरा तैयार करके अपनी-2 औलाद बचने के वास्ते रावण वगैरा के जाल को दफे किया, कि जिसका जिकर अब तक होता चला आ रहा है; फिर इसी तरह से इन सौदागरांन के राक्षसी पाप को दफे करो और “यह किताब कोई ‘मजहब’ के बारे में या ‘ज्ञान’ के बारे में नहीं है, यह सिर्फ जहान की औलाद को बुरे जाल से सुख प्राप्त होने के बारे में आप लोगों को ‘हिदायत’ है”, कि साथ गौर के इस किताब के मजमून को समझ के और अपना फरज़ जान के बन्दोबस्त करो तो इन सौदागरांन का राक्षसी पाप दफे हो जावे तो बहत्तर है, क्योंकि इन सौदागरांन का इस तरह पर दिल है कि जिस तरह से हमने हिन्दुस्तान का धन काबू में कर लिया है उसी तरह से सातों-आठों बादशाहतों का धन हमारे काबू में हो जावे, तो जिस तरह से कि तमाम जहान के राजा बादशाह राज कर रहे हैं और उनका हुकम चल रहा है, इसी तौर से हम अपना राज करें और अपना हुकम चलावें, और जो कि हिन्दुस्तान में और दूसरी विलायतों में कदीमी धन था वोह “इन बनियों ने जादू के जोर से जमीन को फाड़ के खेंच लिया है कि जिस तरह से मंदिरों को जमीन फाड़-2 के उड़ाया था और मंदिरों की पुतलियों को कहीं से कहीं उड़ाके बाहर निकालते थे जिसको दुनिया परचा-परचा कहती है,
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