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जगतहितकाऱणी
सो मैं इन बनियों के साथ संसार की नेकी करने का केई जगह लिख चुका हूँ कि जैसे नेकी इन बनियों के साथ में कुल राजा बादशाह और रैयत वगैरा नेकी है, परन्तु इन सोदागरांन ने उस नेकी करने का ख्याल जरा भी नहीं किया बलके और नेकी के ऐवज में तमाम जहान की अकल अपने राक्षसी पाप से कैद करके खराब कर दी है कि जिसका दुरस्त करना मुश्किल हो रहा है और इसी राक्षसी पाप के जादू से कुल माल अपने काबू में कर लिया है, और इसी सबब से ‘इन सौदागरांन की दुकानें दूसरी विलायतों में, वास्ते धन काबू में करने के गई हुई है,’ सो वहाँ पर भी यह सौदागर महाजनांन इसी तरह से करेंगे कि जिस तरह से हिन्दुस्तान में किया है इसी तरह से दूसरी विलायतों में भी करेंगे। इससे मैं इन सौदागरांन के जाल से वाकिफ करता हूँ और कर रहा हूँ, क्योंकि कुल बनिये अपनी-2 दुकानें ले जा करके पाप को पाप के करने वालों के शामिल होके ज्यादा पाप कराया चाहते हैं क्योंकि यह बनिये ऐसे है कि मिले के तो मिले रहते हैं और राजा-बादशाहों को आपस में लड़ाके मार देते हैं और धन अपने काबू में कर लेते हैं; क्योंकि हिन्दुस्तान का धन इन बनियों ने लोगों की अकल फेर के अपने कब्जे में कर लिया है और दूसरी विलायतों में पहुँच भी गए है, सो संसार के लोग कहते है कि सौदागरर बनिये दूसरी विलायतों में जाते रहते हैं और धन को काबू में करके लाते है परन्तु इन्होंने कैसी अकलमन्दी की है कि गरीबों-अमीरों से मिले के तो मिले रहते हैं और गरीबों-अमीरों को आपस में लड़ाकर मार देते हैं और आप अलाहदा के अलाहदा रह जाते हैं। सो देखो भाई, कि जिस तरह से हिन्दुस्तान का धन अपने काबू में कर लिया है इसी तरह से दूसरी विलायतों का धन अपने काबू में कर लेंगे, सो यह बनिये अपनी अकल से धन का तो धन काबू में कर लेते हैं और सब संसार के दिल में और संसार की औलाद के दिल में यह महाजन लोग मीठे और प्यारे सुझते है और तमाम जहान के लोगों को और रैयत वगैरा को और उन्हों की औलादों को अपने राक्षसी पाप के जादू गारत कर देते हैं, और जो कि गारत करने से बाकी रहे हैं उनको अब गारत कर देंगे: क्योंकि यह बनिये संसार के नाम से और जमीन माता के नाम से अलोप पाप करा रहे हैं जिसकी खबर किसी राजा बादशाह और रैयत वगैरा को नहीं है और अलावा इसके इस जाल की खबर अभी तक अग्रेजों को और दूसरी विलायत के लोगों को बिलकुल नहीं है, अगरचे खबर होवे कि यह बनिये राजा बादशाहों के बच्चे गारत करने के लिए पाप अलोप करा रहे हैं जब तो संसार के लोग और राजा बादशाह एक दिल होकर इन सौदागरांन की औलाद को भी गारत कर देंवे और फिर हरगिज-2 इन्हों के पाप को नहीं चलने देवें, परन्तु इन बनियों ने तो सबकी अकलों को अपने राक्षसी पाप से भ्रष्ट कर दी है कि जिससे इन बनियों का राक्षसी जाल किसी राजा बादशाह को और संसार के लोगों को मालूम नहीं होने देते हैं, और जो मैं इन सौदागरांन के जाल से राजा बादशाहों को वाकिफ करता हूँ तो यह सौदागर बच्चे अपने राक्षसी पाप से उनकी अकलों को फेर करके उन्हों के मुँह से ऐसी-2 बातें बुरी और बेजा कहला देते है कि साध (अनोपदास) ने जो संसार में बनियों के जाल को प्रगट किया है और जाल-2 पुकारता फिरता है; सो साधु को बहम हो गया है, परन्तु राजा बादशाह यह ख्याल नहीं करते है कि “यह फकीर है और इसको रोटी-कपड़े की कुछ भी परवाह नहीं हैं और न किसी तरह का लालच है और न इसके औरत है और न बाल-बच्चे है, जिसकी वजह से कुछ फैल अपने मतलब के लिए करता होगा!” सो इन बातों में से एक भी मुझ में नहीं है, सो इस बात को सब ही हिन्दू-मुसलमान जानते हैं कुछ मेरे लिखने की भी जरुरत नहीं हैं। हाँ, मुझको यह काम करना जरूरी बात है कि जिस सूरत से कुल जहान की औलाद को सुख प्राप्त होवे और किसी किसम की बीमारी नहीं होवे, और कोई कच्ची उमर में नहीं मरे, और पूरी उमर पाकर मरें, इस वजह से यह बोझ, जहान की औलाद को राक्षसी पाप से सुख प्राप्त होने के लिए अपने उपर उठाया है। सो खास वजह इसकी यह है कि यह राक्षसी पाप सौदागर महाजनांन का चलाया हुआ है और कहीं दरियावों के टापु के उपर हो रहा है और मुझको इन सौदागरांन ने अपने राक्षसी पाप से दुखी किया है,. इससे यह जाल मालूम हो गया है लेकिन जोकि जाल को चलाते है और करते हैं वोह काफिर गिने जाते है, और जो जाल को पकड़ता है वोह जीवदान देने के मुवाफिक होता है और समझा जाता है।
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