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जगतहितकाऱणी
सो ऐसे-2 जादू के अन्दर तमाम जहान के लोगों की अकल फिरी हुई है जिससे तुम सबको ऐसा ही सुझता हैछ परन्तु यह तो ख्याल करो कि हम तुमसे एक तालाब का ही जल नहीं बिलोया जाता है तो श्रीकृष्ण महाराज ने समुद्र का जल किस तरह से बिलोया होगा ? क्योंकि श्रीकृष्णजी महाराज तो खुद ही औतार थे कि जिस तरह से हम और तुम सब संसार के लोग है उसी तरह से श्रीकृष्णजी महाराज थे, परन्तु इन बनियों ने दुनिया के भुलाने के वास्ते तरह-2 की किताबें राक्षसी वेद की हिन्दुओं के घर में, हिन्दुओं के बुजर्गों के नाम लिखकर घर दी है और उसी तरह मुसलमानों के बुजर्गों के नाम लिख के घर दी है और राजा बादशाहों के घरों में राजा बादशाहों के बुजर्गों के नाम लिख के घर दी है, परन्तु यह सब जाल इन सौदागरांन के घर का चलाया हुआ है। सो इन्होंने अपने बचाव के वास्ते यह कैसी अकलमन्दी की है कि जब कोई राजा बादशाह इन सौदागरांन के जाल को दरियाफ्त करेगा तो हिन्दुओं के घरों में जाली किताबें निकलने के सबब से हमारा जाल किसी तौर से कोइ नहीं समझेगा बलके किताबों के देखने से हिन्दू-मुसलमान को ही इन्द्रजालियां समझ करके तरह-2 की तकलीफें देंगे, उस हालत में इन्हीं लोगों के बच्चे मारे जावेंगे और हमारे बच्चे बच जावेंगे। इस वजह से इन सौदागरांन ने हिन्दू-मुसलमानों के घरों में अपने राक्षसी पाप से अकल फेर के जाल की किताबें पकड़ा दी है, जिससे तमाम लोग हिन्दूस्तान के आपस में लड़ते चले जाते है; इसी तरह से सौदागर महाजन दूसरी बादशाहतों के लोगों को लाके अपने राक्षसी पाप से अकल को फेरके, और आपस में नाराजगी कराके गारत कर देंगे और इसी तरह से कि हिन्दुस्तान के राजा बादशाहों को गारत करके घन अपने काबू में कर लेंगे। सो देखो भाई, कि यह बनिये सातों-आठों विलायतों के लोगों को गारत करने के लिए अपने राक्षसी पाप को करते जाते हैं और हजारों को राक्षसी पाप से गारत किए है परन्तु बादशाह लोग और तमाम जहांन के लोग इन सौदागरांन के साथ तरह-2 के सल्लुक कर रहे हैं जिस पर यह लोग अपने जाल से बाज नहीं आते है, क्योंकि सौदागरांन को बादशाह ने ‘शाह’ की पदवीं दी है और दूसरे तरह-2 के लाड़ रखते है; और इन बेईएमानों का चाहें कितना ही लाड़ रखे परन्तु इनको तो अपना ही मतलब सुझता है, और यह चाहते हैं कि सातों-आठों विलायतों को गारत करके हमारे औलाद का राज सब विलायतों में हो जावे, इनको तो यह लोभ लगा हुआ है इससे यह लोग अपनी बदमाशई से बाज नहीं आते हैं और अपना राक्षसी पाप तमाम जहान को गारत करने के लिए रात-दिन करा रहै हैं, कि जिसके सबब से राजा बादशाह के लड़के मय रैयत के ऐसे तंग हाल हो रहे हैं कि “जो उन्हों को रोटी-कपड़ा भी नसीब नहीं होता है बल्कि साग तरकारी वगैरा से या कंगा-कंगी वगैरा बेच-2 के दिन गुजारनी करते हैं।” सो यह हाल कुछ छुपा हुआ नहीं है बलके सब साहब अपनी-2 आँखों से देख रहे हैं, कि जैसे हिन्दुस्तान के लोगों की और मक्का वालों की ‘केफियत’ है परन्तु इन सौदागरांन ने राजा बादशाहों के उपर और रैयत के उपर जरा भी ख्याल नहीं किया कि इन राजा बादशाहों ने हमारे साथ में ऐसे-2 सल्लुक किए है कि जिसके अहसान से ‘कयामत’ तक नहीं छूट सकते है और ना अहसान को हम अपने दिल से भूल सकते है परन्तु उन अहसानों को सौदागरांन ने भूल करके उन सल्लुक के ऐवज में यह नतीजा सब संसार के लोगों के लिए जाहिर किया है जिससे साल-ब-साल जादू के सबब से इन सौदागरांन के संसार के लोग गारत होते चले जाते है। सो ऐ भाई मेरे हो, इन सौदागरांनन को सिवाय संसार के गारत करके के और कोई काम नहीं है, सो यह नेकी करने का फल है कि अपने साथ में ‘जाहेराबदी’ कर रहे है जिस पर भी हम तुम लोग इन सौदागरांन की खातीरदारी कर रहे हैं और इन जालिमों के जुलम को सह रहे हैं, जिस पर भी कोई साहब इन्हों का जाल दफे करने के लिए मददगार नहीं होते है ताकि इन्हों का जाल दफे कराया जावें। सो इस बात को भी तो कोई साहब नहीं सोचते है और अकल फिरने के सबब से अपने-2 मतलब में लगे हुए है, और यह नहीं समझते है कि मतलब ही मतलब में और लालच ही लालच में हिन्दुस्तान को और मक्का वालों के गारत कर दिया है, तो इसी तरह से दूसरी विलायतों को गारत कर देंगे; सो इस बात का बन्दोबस्त तमाम जहान के हिन्दू-मुसलमान और अंग्रेज वगैरा एक दिल होकर करो, सो यह बात आप लोगों को सही और दुरस्त जानना चाहिए और जल्दी इस जाल के दफे करने के लिए दिल से किशिश करनी चाहिए ताकि संसार का भला होवे और यह बात तो तुम लोग अच्छी तरह से जानते हो कि जो शख्स किसी के साथ नेकी करता है तो उस नेकी के ऐवज में वोह शख्स अपनी जान देने को तैयार हो जाता है, क्योंकि फलाने ने हमारे साथ नेकी की है परन्तु यह बनिये ऐसे बदमाश है कि चाहें इन बनियों के साथ में नेकी करते रहे हैं तो भी यह बनिये कुछ अहसान नहीं मानते है।
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