राक्षसी पाप से खराब कर दी है जिससे सब राजा बादशाह और गरीब-गुरबा के सबूत को झूठा समझते है और बनियों के सबूत को सच्चा झूठा समझते हैं और बनियों के सबूत को सच्चा जानते है कि जो बिलकुल झूठा सबूत पेश करते हैं, कि जो जाली कागज और बही वगैरा पहले जाल कि बना करके और गवाही- ‘शाबदी’ लोगों से कराके और अपने दस्तखत और अपने कामदार के दस्तखत कराके और मोहर छाप लगाके जरुरत के वक्त अदालत में सबूत पेश करते है; जब वोह कागज अदालत में सच्चा समझा जाता है, सो खयाल करने की बात है कि “सारी दुनिया रात-दिन कमाती है जब भी भूखे मरती है और एक कौड़ी पास नहीं है, और यह बनिये दिन भर बैठे रहते हैं, सो इनके पास ऐसी-2 जालसाजी और बेईमानियों से बहुत कुछ धन है।” जिसकी वजह यह है कि जो बनिये गरीब है और थोड़ा पैसा रखते है वोह संसार के गरीब लोगों का पैसा अनेक तरह से छल और बेईमानी से काबू में करते है और जो बनिये ज्यादा धन-दौलत रखते है, वोह अमीर लोगों का पैसा छल और फरेब और बेईमानी से काबू में करते है; सो यह सब सबब बनियों के राक्षसी पाप का है कि इन बनियों ने सबकी अकलों को अपने राक्षसी पाप से खराब कर दी है जिससे राजा बादशाह गरीब-गुरबा के सबूत को झूठा जानते है, और अलावा इसके गरीब बनिये तो गरीब लोगों के नाम का झूठा कागज करजा देने का जालसाजी से, मय गवाही के बना लेते है और उस कागज पर मौहर छाप लगाके और पुख्ता करके रख छोड़ते है और इसी तरह से ‘तालेवर बनिये’ अमीर लोगों के नाम का कागज करजा देने का झूठा बना लेते है और कहते है कि मुझसे फलाने अमीर सरदार ने इस कदर रुपया, एक रुपया सैकड़े के ब्याज पर लिए हैं और ब्याज के रुपए बनिये को बसूल नहीं हुए होवें तो क्या काम करते हैं कि ब्याज के रुपए जोड़के असल रुपयों में जोड़ देवें कि जो ब्याज के रुपयों का भी ब्याज शुरु हो जावे; सो यह बनिये बेईमान ऐसे-2 कागज झूठी गवाही कराके और मोहर छाप लगवाके और सबूत पुख्ता करके रख छोड़ते हैं और कुछ दिन या बरस गुजरने के बाद यह बनिये रुपयों का तकाजा करते हैं, कि तुम्हारे दादा ने हमारे दादा से इस कदर रुपया करज लिए थे, वोह हमको दे दो; क्योंकि रुपयों का सबूत हमारे पास मौजूद है और तुम्हारे दादा के हाथ का तमसुक लिखा हुआ है, गवाही वगैरा समेत हमारे पास मौजूद है। सो उसने कहने से रुपया दे दिए जब तो खैर, नहीं तो वोह झूठा जाली तमसुक राज में पेश करके और चौथाई देके नालिश कर देते हैं और रुपया वसूल कर लेते है; परन्तु वक्त के हाकिम और राजा बादशाह इन सौदागरांन के जालसाजी पर गौर नहीं करते हैं क्योंकि जो गरीब ने बनिये से करज लिया होवे, तो गरीब यह कभी नहीं कहे कि मैंने नहीं लिया क्योंकि जो रुपया करज लेता है वोह भी अपने पास लेन-देन का सबूत रखता है; क्योंकि जब कोई शख्स किसी के पास से रुपया करज लेता है तो वोह शख्स भी याद रखने के वास्ते दिन मिति लिखवा लेता है, और केई आदमियों को वाकिफ कर देता है, कि इस कदर रुपया मैंने करज फलाने से लिया है, उसकी दिन मिति में भूल ना पड़े; परन्तु सौदागर महाजनांन जाल के कागज-पत्र बनाके रुपया एक जबरदस्ती की राह से ले लेते है और जब गरीब आदमी हाकिम अदालत से फरियाद करके इन्साफ कराना चाहता है और कहता है कि जो रुपया यह सौदागर महाजन हमसे माँगते है वोह रुपए हमने नहीं लिए, और यह कहते हैं तुम्हारे दादा ने हमारे दादा से लिए थे सो हम ईमान धर्म से कहते है कि हमारे दादा ने इनके दादा को ब्याज समेत रुपया पीछे दे दिये, जिसका सबूत हमारी बही में मौजूद सो देख लिया जावे, बलके जिसके सामने दिया है वोह गवाही मौजूद है उनसे अदालत दरियाफ्त कर लेंवे तो अदालत गरीब आदमी का सबूत पेश किया हुआ देखती है तो भी झूठा ठहराते है और बनिये के सबूत को सच्चा जानते हैं चाहे बनिया कैसा ही झूठा क्यों ना हो, परन्तु तो भी राजा बादशाह बनियों को ही सच्चा और ईमानदार जानन के गरीब से रुपया दिलवा देते है और गरीब के सबूत को गौर नहीं करते हैं। जिसकी खास वजह यह है कि इन बनियों ने इन्द्रजाली जाल से तमाम जहानन की अकल और राजा बादशाहों की अकल को कैद कर दी है, जिससे बनियों को ही सच्चा जानते हैं चाहे बनिये साफ झूठे क्यों ना हो और गरीब-गुरबा चाहे सच्चा होवे, परन्तु राजा बादशाह इनको झूठा ही समझते हैं और अलावा इसके सौदागरांनन के कामदार जात का ख्याल करके अपने सेठों का हुकम सर माथे के उपर उठा के हर किसी के नाम का जाली तमसुक बना रखते हैं और गवाही वगैरा करा रखते हैं और मजमून, तमसुक वगैरा का इस तरह से लिखते हैं कि फलाने शख्स ने फलाने सेठ से इस कदर रुपया, इतने ब्याज पर बैल, गायें और मकान वगैरा गिरवी रख के लिए थे; सो यह रुपया मैं नहीं दूँ तो यह कुल चीजें जो तमसुक में लिख दी है, वोह इस करजे बाबत करजा देने वाले के है, हमको राज दरबार में इन चीजों से जो तमसुक में लिख दी है कुछ वास्ता नहीं है, |