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जगतहितकाऱणी
सो ख्याल करने की बात है क्योंकि जमीन माता तो जिन्दा जीव है जिससे कुल चीजें इसके उपर पैदा होती है और संसार इसके उपर रहता है, और यह तो तुम सब संसार को बनियों ने अपने राक्षसी पाप से भुला रखा है जिससे तुम सब संसार को ऐसा ही सुझता है, क्योंकि जो बनिये जमीन माता के नाम का पाप कराते है जिसको सब संसार परचा-2 कहते है और खुश होते है और बनिये भी जाहिरदारी में सब हिन्दू-मुसलमान के सामने परचा-2 कहते है परन्तु यह बनिये अपने दिल में खुश होते है कि हमारा राक्षसी पाप चल रहा है कि जिसको सब संसार के राजा बादशाह और रैयत वगैरा परचा जानते है और बनिये तो अपने राक्षसी पाप को खूब जानते है, परन्तु यह बनिये अपने राक्षसी पाप से अपने पाप की खबर तुम राजा बादशाहों को नहीं पड़ने देते है और मुझ गरीब साधु को इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से कलपाया है जब मुझको इनके राक्षसी पाप की खबर पड़ी है, और जब तक कि मुझको राक्षसी पाप से नहीं कलपाया था जब तक मैं भी अंधों की तरह से था; परन्तु जबकि इन्होंने मुझको अपने राक्षसी पाप से दुखी किया जब मुझको इनके जालों की खबर पड़ी है लेकिन तुम संसार के लोग तो अब तक बेखबर हो, जिसकी खास वजह यह है कि तुम लोगों की अकल इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से खराब कर रक्खी है जिससे इन बनियों की खबर तुमको नहीं पड़ती है। इससे अब मैं सब संसार के बच्चे बचने की गर्ज से इन सौदागरांन के राक्षसी जाल से वाकिफ करता हूँ कि जो कुछ जमीन को रोग हो रहा है और कच्ची उमर में मरते है और मंदिरों की पुतलियों को जमीन फाड़ के बाहर निकाल देते हैं, सो यह सब “फितूरांन”सौदागरांन के राक्षसी पाप का है जिसको तुम सब संसार के लोग और राजा बादशाह और रैयत वगैरा मिलके और एक दिल होके इन्हों के राक्षसी पाप को छोड़ाओ तो संसार की औलाद को सुख प्राप्त होवे; और इन सौदागरांन ने अपने राक्षसी पाप से तमाम जहान के राजा बादशाहों की अकल और रैयत वगैरा की अकल ऐसी खराब कर दी है कि जिसका हाल मैं कलम से नहीं लिख सकता हूँ क्योंकि राजा बादशाह इन बनियों ‘नमक हरामों’ को ही सच्चा जानते है और सभों को झूठा; हालांकि तमाम हिन्दू-मुसलमान सच-2 बात कहते हो तो भी झूठा समझेंगे और सौदागर महाजन जाहे झूठ बोलते हो तो इनको सच्चा समझेंगे, सो यह सारा सबब राक्षसी पाप का है परन्तु हिन्दू-मुसलमान इन बनियों को माँ-बाप के बराबर जानते है, तो भी यह बनिये झूठे-सच्चे कागज करजा के हिन्दू-मुसलमानों के नाम से बनाके रख छोड़ते हैं और कुछ दिन गुजरने के बाद उन्हों से झगड़ा करके उस झूठे-सच्चे करजे में उन गरीबों के घर का माल असबाब और गायें, बैल और भैंस वगैरा जिस कदर माल उसके घर में  निकलता है, करजे में वसूल कर लेते है और एक कागज जाली और उस पर अपने दस्तखत और अपने कामदार के और दो-चार गवाहों के दस्तखत कराके रख छोड़ते है और जबकि अदालत में किसी तौर से ‘वीलुस’ का काम पड़ता है तो यह बनिये उस कागज जाली का सबूत पेश कर देते है और अदालत उस जाली कागज को सच्चा जानती है और बनिया उस कागज को पेश करके सच्चा हो जाता है। सो बनिये के रु-ब-रु गरीब आदमी अदालत में झूठा हो जाता है, यह अदालत का इन्साफ होता है; क्योंकि यह बनिये गरीबों के बुजर्गो के नाम से झूठा जाली ‘तमसुक’ वगैरा लिखके रख छोड़ते है और जबकि उनके बुजर्ग मर जाते है जब उनसे रुपया वगैरा माँगते हैं, कि जो तमसुक के अन्दर लिखे हो और यह लिखते है कि “तुम्हारे दादा ने हमारे दादा से रुपए लिये थे जिसका सबूत तमसुक है और तुम्हारे बाप-दादा के हाथ के दस्तखत मौजूद है, जिसका रुपया तुम दे दो, नहीं तो हम राज में नालिस करके ले लेवेंगे.” अगर गरीब ने डर के बनिये ही के कहने से रुपया दे दिये जब तो खैर, और जो नहीं दिये तो राज नें नालिस कर दी और वोह तमसुक पेश करके राज में कहा कि यह इसके बाप के हाथ का लिखा हुआ है; फिर राज में उस कागज या बही को या तमसुक को देखके बनिये के ‘डिग्री’ कर दी और गरीब आदमी को ‘झूठा’ कर दिया, उससे बनियें को दिला दिया। गर्ज कि, गरीब जो सच्चा होता है वोह झूठा हो जाता है, और गरीब बेचारे की बनिये के सामने अदालत में भी पूछ नहीं होती है और गरीब का भरोसा और दऐतबार नहीं करते है, चाहे वोह कैसा ही सच्चा क्यों ना हो, तो भी उसको झूठा समझते है और बनिये चाहे कैसे ही झूठे क्यों ना हो, तो भी उनको सच्चा समझते है। सो यह सबब इन बनियों के राक्षसी पाप का है कि इन्होंने सबकी अकलों को अपने
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