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जगतहितकाऱणी
इसी तरह से यह महाजन लोग बादी का रोग जमीन माता को कर देते है जब उनको किसी खजानों या मंदिर और मंदिर की पुतलियाँ वगैरा और फकीर वगैरो को जल्दी खेंचना मंजूर होवे तो जमीन माता को बादी की चीस का रोग कर देते है कि वोह चीस फौरन खींच के चली जाती है, जिस जगह पर खेंच के मँगाना और निकालना मंजूर होवे, फौरन जमीन फटके अन्दर ही अन्दर में जमीन के उस जगह पर पहुँचकर बाहिर जमीन के निकल जाते है; जैसे आदमी के शरीर में बादी से चीस हो रही होवे और होते-2 बहुत जल्दी कमर में या पाँव में जाके होने लगे तो आदमी उससे बहोत तकलीफ और दुख पाता है, और इसी तरह से जमीन माता भी उस रोग से बहुत भारी दुख पाती है और जो किसी चीज को होले-2 खेंचना चाहें और निकालना चाहें तो जमीन माता को बादी के सोजन का रोग करा देते है तो वोह चीज होले-2 सरक के जिस जगह खेंचना चाहें, खेंच के बाहिर निकाल देते है, जैसे आदमी के बदन में बादी की सोजन सरकती है, कभी हाथ में, कभी गर्दन में और गर्दन से कमर में और कमर से पाँव में, तो उससे भी आदमी को दरद होता है। इसी तरह से जमीन माता के शरीर में भी बादी की सोजन से दरद होता है और ऐसी-2 अनेक तरह की बीमारियों से जमीन माता दुबली हो गई है इससे जमीन माता की चरबी याने खानें सोने और चाँदी की गल गई है और जब देवी देवता को जमीन फाड़के निकाल देते है जब उनके देखने के वास्ते कुल खलकत जाती है और बहुत खुश होते है और हाथ जोड़ते है और तरह-तरह की दुआयें माँगते है, सो यह सबब बनियों के राक्षसी पाप का है कि जिसका नाम इन्होंने कलूकाल रक्खा है जिससे सब संसार को ऐसा ही सुझता है कि जो दुनिया भरोसा करने को लग जाती है, और यह नहीं समझती है कि यह बनियों के घर का जादू है कि जो देवी-देवता इस कदर दूर पे आके निकले है और नहीं समझते कि पत्थर की पुतली किस तरह से चल सकती है ! सो दुनिया तो इनके जाल में भुली हुई है जिससे कुछ पहचान जादू वगैरा की नहीं हो सकती है कि इन बनियों ने जादू के जोर से तमाम जहान के लोगों की अकल कैद कर दी है कि जो समझाये से नहीं समझते है और जिस तरह से कि जमीन को फाड़ के पोली कर देते है और खजानों को खेंच लेते है, जब तमाम जहान के लोग यह जानते है कि धन सरक गया है; सो जिस तरह से कि यह बनिये खजानों को खेंच लेते है उसी तरह से मंदिरों की पुतलियों को भी जादू के जोर से जिस कदर दूर पे जमीन फाड़के निकालना मंजूर होवे, उसी कदर जमीन फाड़के बाहिर निकाल देते है। अगरचे इन्हों को यह बात मंजूर होवे कि फलाने मंदिर की पुतली को फलानी जगह पर निकाले तो वहीं जाके निकाल लेवेंगे, सो यह बात इस तरह से है कि जो यह बनिये, जिस मंदिर की पुतली के नाम से पाप कराते है तो उसी मंदिर की पुतली को बाहिर निकाल देते है और लोगों के समझाने के लिए पहले ऐसा सुझा देते है कि देवी के मंदिर की पुतली हजार कोस पे जाकर निकली है और देवी बड़े परचे वाली है और यह परमेश्वर की कुदरत है जिसको सब संसार और राजा बादशाह वगैरा वड़ी खुशी के साथ देखने के वास्ते जाते है और ‘डंडोत’ करते है। सो यह पुतलियों का निकालना और जमीन का फटना और काल वगैरा का पड़ना और बीमारियों का और खजानों वगैरा का खेंचना और अकल वगैरा का फिरना और बारिस का ना होना और कम उमर में मरना, जादू से हो रहा है; और यह जादू इन्द्रजाली रावण की तरह से इन बनियों ने बलराजा के बाद से चला रक्खा है कि जहाँ जमीन वगैरा फट जाती है और कहीं की पुतली कहीं पे जाके बाहर निकली है, सो यह बादें तमाम जहान में मशहूर है परन्तु अकल ऐसी खराभ कर दी है कि इस बात को पहचानते ही नहीं है और परचों के भरोसे तमाम लोग भूले हुए और बहके हुए हो रहे है। सो भाई मेरे हो, कि जिस कदर यह परचे हो रहे है यह सब बनियों के चलाए हुए है, इसी तरह से पहले रावण ने भी दुनिया के भुलाने के लिए परचे चलाये थे। चुनाचे बाद मरने रावण वगैरा के इन बनियों ने भी दुनिया को भुलाने के और बुद्धि कैद करके तरह-2 के परचे दिखला दिये है, देखो भाई जब कि अपने बदन में किसी तरह की तकलीफ हो जाती है और हड्डी वगैरा टूट जाती है तो फिर किस तरह का दरद होता है कि जो खाना-पीना भी भूल जाते है, और यह बनिये जादू के जोर से जमीन को फाड़ देते है और तरह-2 के रोग जमीन के नाम से जमीन को करा रहे है और किसी को अपने राक्षसी पाप करने की मालूम नहीं होने देते है, इससे मैं संसार के लोगों को इन बनियों के जाल से वाकिफ करता हूँ कि जिस तरह से तुम्हारे बदन में दरद होता है इसी तरह से जमीन माता के बदन में भी दरद होता है जिसके हाल से संसार के लोग बिलकुल बेखबर है कि यह सौदागर महाजनांन जमीन माता के नाम का पाप कराते है इससे जमीन को तकलीफ दे रहे है, और सब संसार की अकल को अपने राक्षसी पाप से खराब करके ऐसे-2 परचे दिखला रहे है कि जिससे दुनिया यह नहीं समझती है कि रावण के मुवाफिक इन बनियों के घर का राक्षसी पाप चल रहा है बलके संसार के लोग तो परचों के भरोसे भूले हुए है, और इधर-उधर गोते खाते फिरते है और यह समझते है कि परचा कोई निहायत ही उमदा चीज है।
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