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जगतहितकाऱणी
जब हाड़-मांस वगैरा देवतों के उपर डालते है और जादू से काल वगैरा भी पड़ा देते है और दुनिया को जादू से यह सुझाते है कि अबके देवतों की पूजा नहीं की, जिससे काल पड़ा है; फिर दुनिया देवताओं के उपर जीवड़ों को मारने लगती है, तो फिर सौदागर महाजनांन पाप को कम कर देते हैं तो कुछमेह बरस जाता है, और अगर यह महाजन जादू का पाप नहीं छोड़े तो हरगिज नहीं बरसे, चाहे सारी दुनिया के जीव देवतों के उपर मार देवें; तो फिर दुनिया कहती है कि अब के मालिक की ही मरजी मेह बरसाने की नहीं है, सो यह बातें उन मुलकों में होती है कि जीव जिन-2 मुलकों में देवतों के उपर मारते है, सो तलाश करके देख लो परन्तु राजा बादशाह इन महाजनांन के जाहिर को देख के भरोसा करते है, अगरचे अन्दरुनी हाल मालूम होवे तो हरगिज-2 इन बनिये बेईमानों का भरोसा नहीं करें, परन्तु तमाम जहान के लोगों की बुद्धि अपने राक्षसी पाप से ऐसी खराब कर दी है कि जो समझते ही नहीं है, कि जैसे तमाम जहान के राजा बादशाहों की अकल को रावण ने खराब कर दी थी, उसी तरह पर इन बनियों ने भी की है कि जो समझाये से भी नहीं समझते है, और यह बनिये राजा बादशाहों को आपस में लड़ा के मार देते है परन्तु अपने राक्षसी पाप को ऐसे करते है कि बिलकुल जाहिर नहीं होने देते है, इससे राजा बादशाह, हिन्दू-मुसलमान वगैरा यह नहीं जानते है कि राक्षस विद्या का जाल इन बनियों ने भी बलराजा के बाद से रावण के मुवाफिक चलाया है जिसकी खबर किसी राजा बादशाह को अब तक नहीं है, अगरचे खबर होती तो चरुर इन बनियों का जाल दफे करने के लिए बंदोबस्त करते और इन्हों का ऐतबार नहीं करते; परन्तु बड़ी भारी अकल इन बनियों ने यह की, कि पहले तमाम जहान के राजा बादशाहों की अकल और रैयत की ऐसी फेर दी है कि जो जाल इन बनियों का जाहिरदारी में चल रहा है वोह मेरे नजदीक बहुत ही बद है, जिसको तमाम जहान के लोग खास जाल ख्याल करते है, बलके बनियों की बड़ाई करके और बनियों का जाल ख्याल करके अपनी-2 जबान से यह कहते है कि यह कोई जाल बनियों का नहीं है, यह तो परमेश्वर की कुदरत है जिससे तमाम खलकत इन बनियों का भरोसा दिल से कर रही है और यकीन से इन बनियों के जाल को कुल संसार के लोग इश्वर की कुदरत जानते है और यह नहीं समझते है कि यह परमेश्वर की कुदरत नहीं है, लेकिन जबकि बुद्धि कैद हो जाती है। अलावा इसके संसार के लोग यह भी कहते हैं कि हम सब लोग बनियों के सहारे से ही पलते है, अब तुम लोग अच्छी तरह से समझो और देखो कि “जब रावण ने राक्षसी पाप चलाया था जब तमाम खलकत परमेश्वर को भूल गई थी और रावण के राक्षसी पाप की माला फेरती थी” और यह कहती थई कि रावण के सहारे से ही पलते हैं और रावण वहेरा की तरह से, कि जबसे इन बनियों ने राक्षसी पाप चलाया है जब से इनकी माला फेरते हैं और कहते है कि हम बनियों के सहारे से ही पलते है, इससे बनिये मांई-बाप है। सो देखो भाई, जिस तरह से रावण के वक्त में और हरनाकुश के और कंश राजा के वक्त में और कारुन बादशाह के वक्त में परमेश्वर को भूल गये थे और उन्हों के जाल की माला फेरते थे, उसी तरह से ‘अब इन बनियों के जाल की माला फेरते है’ और ईश्वर को भूल गये है और बनियों के जाल को ईश्वर की कुदरत बोलते है और इनके जाल के उपर जरा भी ख्याल नहीं करते है बलके इन्हों के उपर ऐसे-2 लाड़रखते है कि जिस तरह से माँ और बाप के हुकम को बेटा-बेटी उठाते है और अपने बुजर्गों के सामने सर को झुकाते है। अगरचे उन बच्चों को कोई शख्स, कोई बात भली-बुरी कहवे तो वोह बच्चा अपने माँ-बाप से जाकर उस बात को उसी वक्त कह देते है और किसी तरह का डर अपने दिल में नहीं रखते है, सो इसी तरह से हिन्दू-मुसलमान बुरी-भली बात बनियों से छुपाके नहीं रखते हैं और बनियों के उपर लाड़ रखते हैं; सो जब जहान के लोगों तुम अपनी-2 आँखों से देख ही रहे हो कि जैसा हो रहा है, और मैं देख रहा हूँ कि जस तरह से यह बनिये कहते हैं और सलाह करते हैं उसी तरह से होता है बलके “हिन्दुस्तान में तो बनियों का ही डाला निमक पड़ता है” परन्तु हिन्दू-मुसलमान इन बनियों का लाड़ तो हमेशा से ही रखते है और बनिये बेईमानों का माजना देखो कि जबसे इन्होंने राक्षसी पाप चलाया है जबसे संसार का बुरा कर रहे हैं।
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