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जगतहितकाऱणी
तो तुम सौदागर लोग अपने राक्षसी पाप से राजा बादशाहों के दिल में मुझ गरीब को ‘अहमक’ सुझाते हो और राजा बादशाहों को समझाने नहीं देते हो, बलके तमाम जहान के लोगों से मुझको गालियाँ दिलाते हो और रात-दिन पाप कराते रहे हो और छोड़ना नहीं चाहते हो, और जो मैं उनसे न समझने के सबब से लड़ने को लग जाऊँ और नाराज होकर समझाउँ जब वोह समझने वाले मुझको मारने लग जावें, सो यह फितूर तुम सौदागरांन के राक्षसी पाप का ही है, क्योंकि तुम संसार को समझने नहीं देते हो और सबकी अकल खराब कर रहे हो कि जो तुम सौदागर लोग हमको अपने पाप से बुद्धि फेरके लोगों के हाथों से धक्के दिलवाते हो, सो यह तुम सौदागरांन की जालासाजी है कि सभों की अकल को अपने राक्षसी पाप से भ्रष्ट कर दी है, इससे संसार के लोगों को ऐसा ही सुझता है, सो ऐ संसार के लोगों, तुम अपने दिल से इनके राक्षसी पाप को समझो कि किस कदर जाल इन बनियों का चल रहा है कि जिस जाल से तुमको अच्छे-बुरे हाल की खबर नहीं पड़ती है, कि जो बुरा काम करते हो उसको ही अच्छा समझते हो और अच्छे काम को बुरा समझते हो, सो यह राक्षसी पाप बनियों का चलाया हुआ है, सो जब तक कि तुम इन बनियों के जाल को नहीं समझोगे और नहीं छोड़ाओगे जब तक यह बनिये इसी तरह से चलाये जावेंगे, कि जिस जगह मैंने लोगों को समझाया तो वहं पर इन बनियों ने उनकी फेरके मेरे को धक्के लगवाये, लेकिन जब तक कि वोह लोग पाप की वजह से भूले हुए थे और समझते नहीं थे बलके उन्हों को धक्के देने का ही सुझाते थे, इससे मुझको धक्के दिए; परन्तु “जब वो लोग इन बनियों के पाप को समझे तो वोह लोग ही मुझको अपना गुरु समझने लगे। सो ऐ संसार के लोगों! मैं तो किसी का गुरु हूँ ना चेला हूँ और ना किसी को अपना चेला करता हूँ” कि जो इन बनियों ने रावण की तरह से सबकी अकल खराब कर दी है, कि जो अपनी चोरी को संसार पर जाहिर नहीं होने देते है, सो संसार में इनकी चोरी बगैर बताये के किस तरह मालूम हो सकती है, क्योंकि यह बनिये गुप्ती पाप करा रहे हैं, कुछ जाहिर थोड़ा ही कराते हैं कि जो दुनिया को मालूम हो जावेगा, क्योंकि “जिसने राक्षस विद्या की चोरी पकड़ी है और संसार में जाहिर की है वोह जीवदान देने वाले के बराबर है।” सो इस बात को वेद शास्त्रों में भी कहते है और लिखते भी है, परन्तु मैं तो दुनिया के बच्चे मरते हुए देखता हूँ इससे उनके जिन्दा रहने के वास्ते बनियों के पाप को परमेश्वर के लेखे जाहिर करता हूँ, कि दुनिया इस जाल से वाकिफ होकर इन बनियों के पाप को अपने बच्चे जिन्दा रहने की गर्ज से , और कम उमर में ना मरने की वजह से तमाम जहान के लोगों को वाकिफ करता हूँ परन्तु नहीं समझते हैं। सो यह बात ख्याल करने के काबिल है कि तमाम जहान के बच्चे बचने के सबब से इन बनियों के जाल से वाकिफ करता हूँ, हालांकि मेरे बदन में इस कदर ताकत नहीं है कि समझाऊँ और धक्के काऊँ, परन्तु ‘तमाम जहान के बच्चे बचने के गर्ज से धक्के खाता हूँ और समझाता फिरता हूँ’, मगर बाजे शख्स ऐसे मिल जाते है कि धक्के देते हैं और समझते नहीं है; सो यह बुद्धि भ्रष्ट होने का सबब है लेकिन “जिस वक्त मेरे पर ऐसा नाजुक वक्त गुजरता है उस वक्त गम खा जाता हूँ, हालांकि बनियों के जाल को लिखाने में बदन के अन्दर कांपनी छूट जाती है कि जो मारे कमजोरी के बदन से पसीना निकलता है” परन्तु संसार के बच्चे तिरने के वास्ते अपने उपर ऐसी तकलीफ वाजबी जानकर इन बनियों के पाप को तमाम खलकत में समझाता फिरता हूं कि सब संसार मिल के और एक दिल होकर बनियों के जाल को छोड़ओं जब इनका जाल दफे होगा, और जिस कदर की इन बनियो ने मुझको अपने राक्षसी पाप से दुखी किया है, सो इतना तो शनिचर को भी रावण ने दुखी नहीं किया था; क्योंकि शनिचर ने रावण के राक्षसी पाप को पकड़ा था और पकड़कर शनिचर ने रावण को राक्षसी पाप से तमाम जहान को वाकिफ किया और शनिचर ने रावण के भाई भविक्षण को राक्षसी पाप के बारे में कहा कि तेरे भाई रावण ने दुनिया के नाम से और जमीन के नाम से राक्षसी पाप कराया है, जिसकी मुझको अच्छी तरह से खबर है और मैंने रावण की चोरी पकड़ी है, सो संसार के बच्चे बचने के लिए संसार के हाथों से ही रावण के राक्षसी पाप को छोड़ाऊँगा। चुनाचे इस बात के सुनने से भविक्षण अपने दिल में निहायत दर्जे डरा और अपना कुल बचने के वास्ते अपने भाई रावण का राक्षसी पाप को बताया कि रावण ने जिस कदर पाप दुनिया के नाम से चलाया था,
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