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जगतहितकाऱणी
इस बात से सब जहान ने यह विचार किया कि रावण का राक्षसी पाप शनिचर को मालूम है, सो रावण ने अपना राक्षसी पाप शनिचर को ही नहीं बताया तो हमको तो, क्यंकर सच-सच अपना जाल बतावेगा? ऐसा ख्याल करके तमाम जहान ने शनिचर के कहने पर यकीन लाकर दिल में ख्याल किया कि जो अब हम रावण को मय औलाद के नहीं मारेंगे जब तक इसका राक्षसी पाप दफे नहीं होगा, बलके रावण अपने राक्षसी पाप से हमारी औलाद को भी गारत कर देगा। इस वजह से तमाम जहान के एक दिल होकर रावण को मय औलाद के जान से मार दिया, कि रावण के घर में चिराग करने वाला भी नहीं रहा, यह बात दुनिया में अच्छी तरह से मशहूर है, परन्तु अब शनिचर की तरह से इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से कलापाय है परन्तु पाप तो वोह का वहीं है कि जैसा रावण कराता था, उसी तरह से इन बनियों का भी राक्षसी पाप चल रहा है कि जो दुनिया के नाम से और जमीन माता के नाम से करा रहे है। सो यह बनिये अपने राक्षसी पाप से मुझको इस तरह से सुझाते है कि हम तुमको अपने राक्षसी पाप से मार देंगे, इससे मैं भी शनिचर की तरह से बनियों को समझाता हूँ कि जहाँ पर बनियों का मेला होता है और सब पंच सौदागर लोग जमे होते है, वहाँ पर जा-जा के समझाता हूँ कि “तुम अपने राक्षसी पाप को छोड़ दो, सो कोई तो सौदागर लोगों में से यह कहता है कि जिसने चलाया है उसको मारो, और कोई यह कहता है कि हमको खबर नहीं, और कोई यह कहता है कि अभी तो हमारा राक्षसी पाप रावण की तरह से खूब चलेगा और बंद नहीं होगा।“ जिस पर मैंने बनियों से हयह कहा कि तुम लोग एका करके रावण की तरह करते हो, सो छोड़ दो तो भविक्षण की तरह से तुम महाजन लोग भी तिर जाओ, क्योंकि जाल तुम्हारा है, एक शख्स से नहीं चल सकता है, यह तो सब मिल कर चलाते हैं, जब ही चलता है, सो तुम छोड़ दो; क्योंकि जिस कदर तुम्हारा जाल चल रहा है वोह मैंने पकड़ लिया है, सो तुम्हारे छुपाने से नहीं छुपता है और जोकि अब मेरे सामने ही इनकार करते हो तो संसार के लोगों को किस वास्ते अपने पाप को बताओगे, क्योंकि जो मेरे सामने ही इनकार करते हो, कि जो मुझको तुम्हारा राक्षसी पाप कुल मालूम है परन्तु इन्हों को तो मालूम नहीं है; सो फिर इन्हों को किस वास्ते बताओगे और तमाम जहान को गारत कर दोगे और सब संसार का धन अपने कब्जे में कर लोगे। जब मैंने इन्हों से कहा कि “रावण की भी नहीं चली थी तो तुम सौदागरांन की कब चलेगी,” इस वास्ते तुम अपनी औलाद बचने के वास्ते राक्षस विद्या का पाप छोड़ दो, क्योंकि जिस तरह से रावण का जाल शनिचर ने देखा था और रावण से राक्षसी पाप शनिचर ने अपनी जिन्दगी में ही छोड़ाया था, उसी तरह से “अब तुम सौदागर लोग मेरे जीतेजी छोड़ दो, नहीं तो रावण की तरह से तुम्हारी जान भी कुल जहान के लोग एक दिल होकर निकाल देंगे” कि जो मेरे सामने नहीं छोड़ोगे, क्योंकि रावण ने शनिचर से अपने पाप को छुपाया था और कुछ बताया था और कुछ नहीं बताया था, इससे शनिचर ने रावण के पाप को तमाम जहान में जाहिर कर दिया कि रावण ने कुल पाप नहीं बताया है। जो जिस तरह से तुम्हारे दिल में आवे उसी तरह से रावण के राक्षसी पाप को छोड़ाना, चुनाचे तमाम जहान ने शनिचर के कहने पर यकीन करके रावण की जान ही निकाल दी, उशी तरह से अब मैं भी तुम सौदागरांन के पाप को छोड़ाना चाहता हूँ, क्योंकि तुम सौदागर लोग बड़े बेईमान हो कि तुम राजा बादशाह के सामने कसम खा-खा के बच जाते हो और उनसे यह कह देते हो कि हमने पाप करना छोड़ दिया, इससे कुछ सख्त सजा वगैरा नहीं देते है। परन्तु जहाँ पीढ़ी, दो पीढ़ी गुजरी और अपना पाप करना शुरु कर दिया, गर्ज की इसी तरह से चलाते रहते हो परन्तु “अब, जब तक कि कुल पाप को नहीं छोड़ेगे, हरगिज-2 जीता नहीं छोड़ने दूँगा और संसार के हाथों से तुम सौदागरांन को मरवा दूँगा” क्योंकि तुम ऐसे बदमाश हो कि अपने पाप से तमाम जहान को गारत कर देते हो और दया नहीं करते हो, बलके तुमने अपने राक्षसी पाप से सबकी बुद्धि भ्रष्ट कर दी है कि जो मैं राजा बादशाहों के पास मिलने को जाता हूँ और पाप से वाकिफ करता हूँ,
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