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जगतहितकाऱणी
अगर तलाश न करोगे तो यह सब जहान को गारत कर देंगे परन्तु रावण के जाल की खबर राजा बादशाहों को हुई तो उन्होंने उसी वक्त अपनी रैयत से सलाह करके बड़ी भारी फौज तैयार की और अपनी फौज के वसीले से और जोर से रावण को रावण के भाई बेटों समेत और मय फौज वगैरा के गिरफ्तार कर लिया; जब रावण के भाई भविक्षण को बड़ी भारी शरमिन्दगी हुई कि जो निहायत दरजे की शरम और आबरु रखता था, इससे भविक्षण ने अपने बड़े भाई का जाल कुल जहान के लोगों पर जाहिर कर दिया कि जो रावण ने राक्षसी विद्या का पाप चलाया था, मगर पेशतर लंका जाहिर नहीं थी, ‘पोशीदा’ थी; परन्तु भविक्षण के बताने से और शनिचर के कहने से संसार में जाहिर हुई है, जिसका हाल साफ तौर पर किताबों से साबित होता है, परन्तु जब तक कोई भी लंका का नाम नहीं जानते थे लेकिन रावण के भाई बेटे और उनकी औलाद जानती थी और किसी को भी खबर नहीं थी क्योंकि रावण राक्षस विद्या का पाप लंका में कराता था और मय कबीले के, और मय भाई बेटों अपने के लंका में रहता था। इससे उनकी औलाद भी अपने बुजर्गों के मुवाफिक ही काम करते थे क्योंकि जैसा राक्षसी पाप चलाया था उसी तरह से उनके भाई बेटे भी कराते थे, परन्तु जबकि उनके पाप को संसार ने एक दिल होकर छोड़ा दिया तो कुछ दिन गुजरने के बाद हरनाकुश वगैरा ने भी तरह-2 से राक्षसी पाप चलाया था जिसका हाल साफ तौर से उपर लिखा गया। उसी तरह अब इन बनियों ने भी बलराजा के बाद से राक्षसी पाप चलाया है और सबकी अकलों को राक्षसी पाप से खराब कर दिया है और इन बनियों का गिरोह हिन्दुस्तान में से रावण की तरह से पाप करानने को निकला है, जबसे बराबर दुनिया के नामका पाप करा रहै हैं जिसकी खबर दुनिया को बिलकुल नहीं हैं; परन्तु इस कदर अलबत्ता मालूम है कि इन बनियों ने राक्षसी पाप चलाया था उस जमाने में बादशाह ने ‘जैन धर्म के मंदिर’ गिरवाये थे जिसका अब तक सबूत मौजूद है बलके इसका हाल तवारिखों से जाहिर होता है कि जिस कदर मंदिर के अन्दर पुतलियाँ थी उनकी नाकें तक काट गई थी। सो सब संसार के लोग जानते हैं, परन्तु मंदिरों का गिरवाना और पुतलियों की नाकों का काटना इस वजह से हुआ था कि इन सौदागर महाजनांन ने राक्षस विद्या का पाप चलाया था, इससे मंदिरो को और मंदिरों की पुतलियों को बादशाह ने तुड़वाया था, परन्तु सौदागर महाजनांन अपने फरेबी हीले से कब बाज आते है बलके यह तो उसी तरह से राक्षसी पाप चला रहे हैं जबसे अब तक किसी को भी इनके राक्षसी पाप की खबर नहीं हैं; परन्तु अब मुझको राक्षसी पाप में इन बनियों ने दुखी किया है जब मुझको इनके राक्षसी पाप की खबर पड़ी है, जिससे मैं इन बनियों के राक्षसी पाप के दफे कराने के लिए कोशिश कर रहा हूँ। सो तुम सब संसार के आदमियों और राजा बादशाहों एक दिल होकर इस काफिर विद्या को छोड़ाओ, जब तुम्हारी औलाद बचेगी और पहने इन बनियों ने राक्षसी पाप चलाया था, सो जब बादशाह को खबर पड़ी थी तो बादशाह ने इन बनियों को सजायें दी थी, जब सच-2 बोलकर अपना पाप बता दिया और पाप को छोड़ दिया और आयन्दा के वास्ते यह इकरार हाथ जोड़ के और कसमें खाकर किया था, कि “ऐ बादशाह ! अब हम सौदागरांन से दुनिया के नाम का पाप नहीं होगा और अब के कसूर को अपना बाल-बच्चा जान के माफ करो, और छोड़ दो।” इसी तरह से बादशाह ने सौदागरांन की कसम का भरोसा करके सोदागरांन को छोड़ दिया, परन्तु इन सौदागरांन ने कसम का डर करके दो-तीन पीढ़ी तक तो राक्षसी पाप का करना बन्द कर दिया परन्तु इन बनियों ने अपने दिल में ऐसा ख्याल करके कि अब हम अपना राक्षसी पाप करेंगे तो अब हमारे जाल की खबर किसी को भी नहीं होगी, इससे इन बनियों ने फिर अपने राक्षसी पाप का करना शुरु कर दिया है और जब से कि राक्षसी पाप का करना शुरु किया है जब से संसार के लोगों को गारत कर रहे है। सो मैं आप लोगों को समझाने के वास्ते राक्षसी पाप का हाल लिख रहा हूँ कि यह बनिये बड़ेजाली और बदकार है कि बादशाह से कसम धरम खाके भी बाज नहीं रहे हैं तो अब किस तरह से रह सकते है, सो अब तुम राजा बादशाह इन बनियों का भरोसा न करके इनके पाप को फौरन छोड़ाओ और पहले बादशाहों की तरह से इन बनियों से कसम धरम न लोगे, और न अब इनके धोके में आओगे; क्योंकि इनके कसम का कुछ भरोसा नहीं,
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