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जगतहितकाऱणी
परन्तु सौदागर महाजनांन की बराबरी हरगिच नहीं कर सकेंगे; क्योंकि हमारे पास जब कुल जहान का असली पैसा है या होगा और हिन्दू-मुसलमानों के पास नहीं है और न अंग्रेजों के पास है और न होगा तो फिर हिन्दू और मुसलमान और अंग्रेज और सातों-आठों विलायतों की रैयत हमारी बराबरी नहीं कर सकेंगी, परन्तु यह बनिये तीन हिस्से से ज्यादा अपने राक्षसी पाप से कुल जहान के बच्चे गारत कर देंगे, जब एक हिस्से से कम आदमियों को देख के ज्यादा अपना जोर-शोर दिखावेंगे और जब तक कि हिन्दू-मुसलमान और अंग्रेज और सातों-आठां विलायतों के लोग गारत न हो जावेंगे जब तक तो यह बनिये राक्षसी पाप के करने वाले गरीब होकर रहेंगे और जब कुल दुनिया गारत हो जावेगी, जब यह बनिये अपने राक्षसी पाप से तमाम जहान की अकल फेरकर इस कदर जोर-शोर फेलावेंगे कि जिस तरह से राजा रावण ने राक्षस विद्या का पाप चलाया था और यह समझा था कि मैं अपनी औलाद समेत जबरदस्त रहूँगा, तो फिर हमारा ही राज-पाट हो जावेगा, सो इन बनियों ने ही ऐसा ख्याल करके राक्षस विद्या का पाप चलाया है कि जिस तरह से रावण ने राक्षस विद्या का गुप्ती पाप चलाया था, इस वजह कुल जहान ने एका करके रावण की औलाद समेत रावण को मार दिया, सो इस बात का ख्याल तो बनियों ने बिलकुल नहीं किया कि जो कोई शख्स राक्षसी पाप चलाता है पड़ जाती है तो संसार के लोग राक्षसी पाप चलाने वाले को भय कुल और औलाद के गारत कर देते हैं कि जैसे रावण के राक्षसी पाप को संसार ने रावण को गारत करके छोड़ाया है; सो अगर हम सौदागरांन के जाल की खबर संसार को पड़ गई तो रावण की तरह से हम सौदागरांन की भी जान रावण की तरह से कुळ जहान के लोग एका करके निकाल डालेंगे; सो इस बात को तो इन बनियों ने बिलकुल नहीं सोचा बलके पैसे का लालच करके राक्षसी पाप को चला दिया है और सबकी अकलों को जाल ही जाल में कैद कर दिया है, और जब कि रावण ने राक्षसी पप चलाया था तो जहान के लोगों ने रावण के कुल को मार करके राक्षसी पाप को छोड़ाया कि जिस कदर रावण ने चलाया था, परन्तु भविक्षण ने अपनी औलाद के हाथ से राक्षसी पाप नहीं होने दिया और रावण का पाप सब सृष्टि में भविक्षण ने जाहिर कर दिया इससे भविक्षण की औलाद सलामत रहीं, क्योंकि भविक्षण परमेश्वर का भक्त था, इससे भविक्षण अपने दिल में भक्ती के सबब से डरा और अलावा इसके संसार के लोगों का ख्याल करके अपने दिल में विचार किया कि जो मैं रावण के साथ राक्षसी पाप करुँगा तो अव्वल तो मेरी भगती में बट्टा लग जावेगा और मुझको भी रावण के साथ ही गारत कर देंगे। इस वजह से भविक्षण नेकी में चलता रहा और नेकी की वजह से अपना नाम इस जहान में सलामत रख गया कि जो कदीम से भविक्षण का नाम भक्ति के सबब से और नेकी की वजह से पीढ़ी-दर पीढ़ी सुनने में चला आता है, और ऐसा भी सुनने में आता है और किताबों में भी लिखा हुआ है कि पहले भी रावण की तरह से इन बनियों ने राक्षसी पाप चलाया था सो जबकि इनके जाल की खबर पड़ी जब राजा बादशाहों ने इन बनियों से दरियाफ्त किया तो नहीं बताया; जब राजा बादशाहों ने इन बनियों को सख्ती दी और जितने की मंदिर “जैन धरम” के थे उनको एक दो मरतबे गिरवाये थे और जो कि मन्दिरों के अन्दर पुतलियाँ थी उनकी नाकें कटवाई। सो यह बातें दुनिया में मशहूर है सो जिस वक्त कि इन बनियों ने जाल चलाया था और राजा बादशाहों को इनके जालों की खबर पड़ी थी उस वक्त तो बादशाह इन बनियों को बनियों की औलाद समेत रावण की तरह से गारत किया चाहते थे, परन्तु इन बनियों ने ऐसी अकलमंदी की, कि कुल बनिये बादशाह के सामने यह अरज करने लगे कि बेशक हमसे कसूर हुवा; सो हाथों-पाँव पड़के और तरह-2 की कसमें खाकर भविक्षण की तरह से अपनी औलाद को बचा लिया और कुछ दिनों तक फिर राक्षसी पाप नहीं कराया। सो भाई मेरे हो, भविक्षण तो सच्चा भक्त था, नहीं चलने दिया परन्तु इन बनियों ने तो फिर चला दिया और पहले इन बनियों को बादशाह ने इस गरज से नहीं मारा था कि इन्होंने हाथों-पाँव पड़के माफी चाही थी और यह वादा कर लिया थछा कि कभी राक्षसी पाप नहीं करावेंगे। सो बादशाह ने इन बनियों का ऐतबार करके छोड़ दिया था, जिसकी वजह यह है,कि संसार के आधे लोगों ने तो यह कहा कि इन काफरों को मार
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