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जगतहितकाऱणी

माता को तरह-2 का रोग करुँगा तो जहान के लोगों को मेरा राक्षसी पाप का करना मालूम नहीं होगा, तो सब जहान को गारत करके अपना राज करुँगा, और जो मैं दुनिया के नाम का पाप न करुँगा तो दुनिया को मेरे राक्षसी पाप की खबर पड़ जावेगी तो मेरी औलाद को ही मार देंगे। इससे रावण ने राक्षस विद्या का पाप चला करके संसार के लोगों की अकल को पहले से खराब करदी थी, इससे जमीन की पहचान संसार के लोगों को बिलकुल नहीं थी; सिर्फ जमीन की पहचान जमीन रावण की ही औलाद जानती थी, सो अगले जमाने के लोग वेद की किताबों में और पुराणों में इन बातों को लिख गये है क्योंकि जमीन माता की पहचान तमाम दुनिया को रावण ने भूलादी थी, सो जमीन को तो जिस तरह से हम ओर तुम जानते हैं उसी तरह से वोह भी जानते थे, परन्तु राक्षस विद्या के पाप से जमीन माता को रोग कराता था जिसकी मालूम तक नहीं पड़ी थी। अगरचे दुनिया को खबर पड़ जाती तो दुनिया रावण की औलाद की औद को ही निकाल देती, क्योंकि जमीन के सहारे तो कुल जहान पलता है क्योंकि जमीन माता का शरीर तो एक है। सो भाई मेरे हो, जबके जमीन के शरीर में दरद होगा तो उस वक्त तमाम सृष्टि कहाँ रहेगी, ऐसा ख्याल करके संसार ने ऐक दिल होके रावण की औलाद को ही मार दीया, उस हालत में राक्षस विद्या का पाप संसार से मिटा था क्योंकि जिस कदर पाप होता था, बिलकुल तजा दिया, हालांकि पहले जमाने के राजा बादशाहों को शनिचरजी महाराज ने राक्षसी पाप से वाकिफ करके कहा कि यह जो जमीन माता को तरह-2 की तकलीफें होती है जिसके हाल से मैं तुम सब लोगों को वाकिफ करता हूँ, क्योंकि रावण राक्षस विद्या के पाप से मुझको भी दुख देता है और जमीनमाता के भी नामका पाप कराता है, इससे मैं आपको वाकिफ करता हूँ कि रावण ने संसार के लोगों को स्वर्ग ही भुला दिया था और रावण जमीन को हर किसम का रोग कराता था और हवा वगैरा बहोत चलाता था परन्तु दुनिया बिलकुल नहीं समझती थी कि यह राक्षसी पाप है, क्योंकि जब किसी आदमी को दम का रोग होता है तो फिर उसके शरीर में बिलकुल हवा नहीं समाती; जिस तरह से कि आदमी के पेट में दम की बीमारी से सांस नहीं समाता है, क्योंकि हवा है वोह तो दम है कि जब आदमी को दम की बीमारी हो जाती है तो बीमारी के सबब से आदमी किस कदर दुख पाता है कि जो मरने के लायक हो जाता है, तो ऐसे-2 रोग रावण राक्षस विद्या से कराता था जिससे अगले जमाने के सती लोगों को भी मालूम नहीं होने देता था, क्योंकि ज्यादा हवा जो चलती है वोह जमीन माता को दम का रोग है परन्तु दुनिया तो भी नहीं समझती थी कि जमीन माता को दम का रोग हो गया है, क्योंकि दुनिया को भुला रखा था जिससे दुनिया यह नहीं समझती थी, कि जमीन माता बीमार है या अच्छी है और हवा वगैरा जो ज्यादा चलती थी तो झाड़दरखत वगैरा भी टूट जाते थे और फल-फूल गिरने लगते थे, तो भी नहीं समझते थे कि जमीन माता को जादू से रोग कर दिया है, क्योंकि दुनिया की बुद्धि खुद जादू के पाप से फिरी हुई थी, यह तो समझते थे कि जमीन के पेट में हम सब संसार बसते हैं परन्तु जमीन माता के दुख बीमारी से कोई वाकिफ नहीं था क्योंकि रावण जादू से तरह-2 के रोग कराके धान घास वगैरा का नुकसान कराता था, तो यह समझते कि नहीं मालूम की जमीन को क्या हुआ है? और जब दुनिया जमीन माता की बीमारीयों को नहीं समझती थी तो इससे कहा जाता था कि दुनिया स्वर्ग भूल गई थी और स्वर्ग नाम सुख व आराम का है और जमीन के सिवाय दूसरा स्वर्ग कोई नहीं है। इसी तरह से रावण जमीन माता को दम का रोग कराता था जिसका हाल अगले जमाने के सती लोग वेद और शास्त्र में लिख गये हैं कि हमको यह खबर नहीं थी कि हमारी बुद्धि जादू से कैद है या नहीं, सो उसी तरह से इस वक्त में ऐसी ज्यादा और जोर की हवा जलती है वोह जमीन माता को दम का रोग है लेकिन जबकि थोड़ी-2 हवा चलती है जब यह जानना कि आदमियों को और जानवरों को सुख प्राप्त हुआ है, जब यह जानना कि जमीन माता सीधा सांस लेती है, और दुनिया यह जो कहती है कि रावण सूरज-चंद्रमा को गहण कराता था सो दुनिया ग्रहण-2 करती थी, परन्तु यह नहीं समझते थे कि यह जमीन माता को दरद होता है। सो ऐसे-2 जाल राक्षस विद्या के चलाने वाले अगले सती लोगों को भी मालूम नहीं होने देते थे,

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