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जगतहितकाऱणी

लिख दिये हैं और दूसरी विलायत के आने बालों की भी बुद्धि भ्रष्ट कर देते है कि वोह फिर दरियाफ्त नहीं करते कि किताबों में लिखा होने से संसार का बुरा थोड़ा ही होता है, टीपणे पोथियों के बांचने से संसार का कुछबुरा नहीं होता है यह तो जब होम कराके चौरासी लाख कुण्डियों पर, जो अलोप बनाई है उन पर पाप कराते हैं जब संसार का बुरा होता है और पोथियाँ और टीपणे भी सच्चे हो जाते है, और दूसरी विलायत के आने वालों की ऐसी बुद्धि भ्रष्ट कर देते है कि उनको यह मालूम नहीं होता कि जो चोर जाल चलाते है जब तक उनका बन्दोबस्त नहीं होगा और वोह चोर नहीं पकड़े जावेंगे तो हमको भी और दूसरी विलायतों को भी गारत कर देंगे, ऐसे उनको यह बनिये सोचने नहीं देते है और अच्छे भले आदमी सती बन के मिल जाते है और वोह यह नहीं सोचे कि यही हमारे और कुल संसार के बच्चों का बेईमान बनिये काल है और वोह दूसरी विलायत वाले यह नहीं सोचते है कि इन बनिये ही बेईमानों ने दुनिया में बुरा होने की पोथियाँ और टीपणे वगैरा चलाये है। सतजग में जो धरम का वेद था वोह तो इन बनियों ने अपने काबू में कर लिया है और जाल का चला दिया है जैसे कि, रावण ने असली किताबें वेद की दबा ली थी और राक्षसी वेद की चला दी थी, उसी तरह इन बनियों ने भी अपना जाल रावण वगैरा के मुवाफिक चलाया है और पहले से संसार का बुरा होने के वास्ते इन महाजनांन ने ऐसी-2 बातें चलाई है, सो कहने से तो कुछ नहीं होता है परन्तु पहले जैसा कहते है फिर वैसा ही पाप चौरासी लाख कुण्डियों पर कराते जाते हैं तो फिर वैसा ही होता जाता है और दुनिया में इन महाजनांन ने ही ऐसी-2 बातें चलाई है कि सूरज सेस किरण से तपेगा, जिसकी गर्मी से जमीन माता सुरख ताँबे के रंग हो जावेगी, और जो कि जमीन के उपर पानी है वोह इस तरह से गर्म होगा कि जिस तरह से कड़ाई के अन्दर तेल उनटता है इसी तरह से पानी उनटेगा। सो देखो भाई, दुनिया के भुलाने के वास्ते यह कैसी बात पहले से चलाके जाहिर की है कि सूरज तपेगा, सो यह बात बिलकुल खिलाफ है और हम तुम लोगों को भूल बताई है क्योंकि जब तमाम जहान के लोग इस जाल में पड़ेहोंगे तो हमारे पाप की पहचान नहीं कर सकेंगे, इस सबब से ऐसी-2 बातें तरह-2 की पहले से जाहिर कर दी है कि जिन बातों का हम तुम अपनी जबान से बिखान कर रहे हैं सो यह बात इस तरह से नहीं है, यह तो इस तरह से है कि जैसे अपने शरीर के अन्दर बीमारी के सबब से बीसकांटा वगैरा निकलता है तो जहर निकलने के वक्त किस कदर दरत होता है कि जिसकी गर्मी की वजह से कुल शरीर में तरह-2 की तकलीफें पैदा हो जाती है और मगज भी जलने लगता है, जब उसका इलाज किया जाता है और कोई दवा इत्तफाक से मुवाफिक आ जाती है तो फौरन तबियत को आराम हो जाता है, मगर बलराजा के बाद से इन सौदागर महाजनांन ने इन्द्रजाल के पाप से जमीन को बीमार करके ऐसा कमजोर कर दिया है कि चरबी तक गल गई है। सो ऐसे-2 रोग तो जमीन माता को जाहिर ही है कि जिन्हों को सब जहान के लोग अपनी-2 आँखों से देख रहे हैं कि जहाँ पर ज्वालामुखी पहाड़ है उस परबत में आग लगी हुई रहती है, और जो कि दूसरे पहाड है वोह जमीन माता के शरीर के हाड़ है, सो इसी तरह से ज्वालामुखी पहाड़ भी जमीन माका के शरीर का हाड़ है और जो कि ज्वालामुखी पहाड़ में आग लगी हुई रहती है वोह जादू चाले का रोग है जिसको हिन्दू-मुसलमान अंग्रेज वगैरा देख रहे हैं और सुनते भी है। सो यह बात इस तरह पर है कि जब किसी के पैर में कीड़ीनगरा हो जाता है और कीड़ीनगरे के सबब से उसके शरीर का हाड़-मांस वगैरा गल के गिरने लग जाता है तो उसके शरीर में गरमी के सबब से कैसी-2 जलन पड़ने लगती है? तो इसी तरह से जमीन माता के शरीर में जादूचाले का रोग है जिससे जमीनमाता बहुत दुख पा रही है, क्योंकि जमीन माता भी जीवता जीव है और फिर कहीं-2 पर तपत कुण्ड बनाए है सो वोह भी जादू चाले का रोग है, सो जिस तरह से कि लहू का राध बनता है तो फिर उस राध से कैसा भारी दुख और दरद और जलन हो जाती है, और इस तरह से इन सौदागर महाजनांन ने केई-2 तरह के रोग राक्षस विद्या के पाप से जमीन माता को बलराजा के बाद से सरद-गरम का रोग करते है, परन्तु संसार के लोग अभी तक परचों के भरोसे भूले हुए है,

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