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जगतहितकाऱणी

आदमी के वास्ते सब दुनिया को जला देवे, यह बात किस तरह से समझ में आवे और अलावा इसके अपने हाथ से खोली की तरह से अपनी खाल उतार के उस फकीर ने डाल दी बताते है, सो यह बात भी समझ में नहीं आती है, सो भाइयों गौर करो कि खोली की तरह से खाल किस तरह से आदमी अपने हाथ से उतार सकता है? यह बात सिर्फ राक्षसी जाल की है और मालिक ने तो यह खाल खोली की तरह से उतरने के लायक तो बनाई भी नहीं हैं, सो ऐसी-ऐसी बातें और किस्सा पहले से चला दिये है और ऐसी-2 बैतें जतियों के नाम से सुनाते है कि जती लोग तारे और चन्द्रमा को उतार लेते हैं और बड़े करामाती है, सो यह बात इस तरह से है कि जब तारे उतारे तो जैसे आदमी का जीव बिखरने लगता होवे, जब ऐसा रोग दुख जमीन माता को तारे उतरने से होता है और सूरज-चंद्रमा को जो उतारे तो जमीन माता को यह ऐसा रोग है कि जैसे जीव धबराके भूला हुआ हो जाता है। जब सूरज-चन्द्रमा को उतारे तो ऐसे-2 रोग व दुख जमीन माता के जीव को हो जावे, जो यह बनिये सूरज-चन्द्रमा को नीचे उतारे तो ऐसा-2 दुख हो जावें और बातें जाल की ऐसी चलाई है कि करामात से तारे, चंन्द्रमा, सूरज वगैरा उतारते हैं और फकीरों को भी ऐसा ही सुझा देते हैं कि हम बड़े करामाती है और ऐसे ही संसार को सुझा देते है कि यह फकीर साधु लोग बड़े करामाती है, और जैसे रावण वगैरा ने रखेश्वरों को और संसार को करामात के भरोसे भुलाये थे इसी तरह से यह बनिये भी भुला रहे हैं। सो मैं आप लोगों को वाकिफ करता हूँ कि जब दुनिया भूल में पड़ जावे तो यह बनिये बेईमान जादू से सूरज-चंद्रमा को नीचे उतारने लग जावेंगे, सो इनका मतलब यही है कि बड़े लोग सब उजड़ जावे तो सब संसार में हमारा राज हो जावे; सो दुनिया में भी यह बात कहते हैं कि दिल्ली फकीरों जोगी अब हुई है सो बगैर पैसा के लोग फकीर ही हो गये है और होले-2 सातों-आठों विलायतों को फकीरों जोगी याने जैसे दिल्ली हिन्दुस्तान की विलायत को कर दिया है ऐसे ही कर देंगे, और सब दुनिया करामात के भरोसे भुली हुई है और असल में इन महाजनांन का यह जादू का जाल है और जादू की करामात चलाई है, और दुनिया में यह कहते हैं कि फकीरों ही ने बददुआ दा है जो बादशाहों का राज जाता रहा है; और असल में तो राज इन महाजनांन के जादू से डूबा है और फकीरों की भी बुद्धि भ्रष्ट करके उनके मुँह से जादू से कुछकी कुछबददुआ कहवाकर, फिर जादू से राजा बादशाहों के नामका होम कराके उनकी बुद्धि भ्रष्ट करके, आपस में लड़ा करके मरा देते है या और कोई बिगन करके और जब राजा बादशाहों की बुद्धि भ्रष्ट कर देते हैं तो वोह फकीरों से करामातें पूछने लगते है, और यह नहीं समझते कि करामात क्या चीज होती है? क्योंकि उनकी बुद्धि तो जादू से भ्रष्ट कर देते हैं, इससे वोह करामात पूछने लग जाते हैं, और जो फकीर साधु बददुआ नहीं देवे तो भी यह बनिये महाजन जादू से गारत कर देते हैं, परन्तु फकीरों की बददुआ का तो एक रावण के मुवाफिक बहाना चलाया है जैसे रावण ने जादू से फकीरों की करामात चलाई थी और केई फकीरों के मुँह से कहवाकर जादू से केई राजा बादशाहों को डबो दिये थे, और रामचंद्रजी महाराज के उपर भी जादू से ग्रह करके रावण ने वनवास दिला दिया था, उसी तरह से अब इन बनियों ने फकीरों की करामात का जाल जादू से चलाया है चाहे फकीर कुछ भी नहीं कहें, सो यह बातें कोई-2 पोथियों वगैरा में लिखी है, सो तुम संसार के किसी-किसी लोगों ने देखा ही होगा, नहीं तो पोथियों तलाश करके देखलो कि यह लिखा होगा कि फलाने राजा का राज इतने बरस रहेगा और फलाने बादशाह का राज इतने मुद्दत तक रहेगा और अंग्रेजों का भी कहते हैं कि इतने बरस रहेगा। सो यह पोथियों कोई-2 हिन्दू-मूसलमानों के घरों में प्रगट भी है और किसी-2 ने देखी भी होगी और हिन्दूओं की पोथियों में तो हिन्दुओं के फकीरों के नाम है और मुसलमानों की किताबों में मुसलमानों के फकीरों का नाम लिख दिया है, और बनाके इन बनियें बेईमानों ने चलाई है और आप प्रगट ना होने के वास्ते अपना नाम पोथियों में नहीं लिखा है, क्योंकि कोई पर विलायत के जब यहाँ आवेंगे तो हिन्दु-मुसलमानों के बच्चे मारे जावेंगे और हमको कोई नहीं पूछेगा, तो यह बनिये खुद बच जावेंगे; अपने बचने के वास्ते ऐसा काम किया है कि पोछियों में दूसरों के नाम लिख दिये हैं और दूसरी विलायत के आने बालों की भी बुद्धि भ्रष्ट कर देते है

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