क्योंकि हमारे बुजर्गोका नाम टीपणों के अन्दर लिखा हुआ है, इससे इन टीपणों को हम अपना जारते हैं, क्योंकि रावण ने हजारों तरह के जाल करके राक्षसी वेद के टीपणे वगैरा रखेश्वरों के हाथों में पकड़ा दिये थे तो रखेश्वर लोग ऐसे-2 सती थे जैसे शिवजी और ब्रह्माजी और रामचंद्रजी सरीखे और रखेश्वर वगैरा ऐसे-2 लोग रावण के इन्द्रजाल के पाप में भूल गये थे, तो इस वक्त के आदमियों की तो क्या चलाई! जब ऐसे-2 सती लोगों को भी खबर नहीं पड़ी थी कि इन्द्जाल में हमारी बुद्धि कैद है, तो आज कल के जमाने के लोग किस तरह से इस इन्द्रजाल का हाल मालूम कर सकते है। रावण ने शनिचर को समामुख कलपाया जब रावण के जाल की खबर पड़ी तो शनिचरजी ने सब दुनिया को वाकिफ कर दिया जब सब दुनिया को और रखेश्वरों को खबर पड़ी सो तमाम बातें रावण के इन्द्रजाल की अगले सती लोग वेद शास्त्र में लिख गये हैं और दुनिया में मुँह जबानी भी कहते हैं कि रावण ने इस-इस तरह से इन्द्रजाल चलाया था, सो मेरे को भी इन बनियों ने शनिचरजी की तरह से समामुख कलपाया है। इस वास्ते मैं तमाम संसार को वाकिफ करता हूँ और जब मुझको समामुख नहीं कलपाया था तो मुझको भी तुम्हारी तरह से कुछ खबर इस इन्द्रजाल के जादू की नहीं थी, सो यह जाल सब संसार मिलकर छोड़ाओं तो तुम्हारे सब संसार की औलाद उभरेगी, नहीं तो यह बनिये अपने लोभ और धन के वास्ते सब दिनिया को गारत कर देंगे; इस वास्ते तरह-2 के छल करके राक्षस विद्या के टीपणें हम ब्राह्मणों को पकड़ा दिये हैं। सो ऐ भाइयों, इन बनियों के तो अनेक तरह के जाल है कि जिसका अन्दाज कुछ नहीं हो सकता, क्योंकि इन बनियों ने इस तरह के फरेब करके राक्षसी वेद के टीपणे ब्राह्मणों को पकड़ा दिये हैं सो यह टीपणे सिर्फ ब्राह्मणों के कुल और औलाद मराने को पकड़ा दिये है और आप अलाहदा के अलाहदा रह गये है; क्योंकि जो टीपणे सतजग में थे उनमें दिन मिति याद रहने के वास्ते लिखी हुई थी, “नेम धरम” पुण्य करने के वास्ते थे, सो असली टीपणे तो इन बनियों ने दबा लिये है कि जिस तरह से रावण वगैरा ने दबा लिये थे और अपने जाली टीपणे चला दिये थे, उसी तरह से इन बनियों ने भी बलराजा के बाद से राक्षसी पाप को चला करके रावण के तौर पर इन बनियों ने असली टीपणे तो दबा लिये है और अपने तौर पर जाल के टीपणे रावण की तरह से चला दिये है, मगर दिन व मिति इन टीपणों में भी याद रहने के वास्ते लिख दी है और ग्रह चाला और रोग चाला व माँदगी वगैरा के बारे में लिखा है; और ऐसा भी लिखा है कि कलजग इस तरह का आवेगा कि “बहन व भाई आपस में हराम काम करेंगे” क्योंकि यह बनिये जादू से बुद्धि भ्रष्ट कर देवें तो आदमियों की बुद्धि जानवरों के सुवाफिक हो जावे, फिर आदमी भी बहन-बेटी को नहीं समझे, लेकिन जिस तरह से संसार मे भूल पड़ती जावेगी जब यह महाजन ऐसी बुद्धि भ्रष्ट करेंगे, जब जानवरों के मुवाफक बहन-बेटी से हराम करने लगेंगे; सो अब इस जाल की खबर पड़ गई है सो सब संसार मिलकर इस जाल को छोड़ाओं, नहीं तो इन महाजनांन ने जिस तरह से टीपणों में लिखा है तो वैसे ही यह बनिये बुद्धि भ्रष्ट करके कर दिखावेंगे, क्योंकि “तुम ज्योतिष के भरोसे भूले हो” और यह राक्षसी जाल है सो यह टीपणे तो राज के परवाने मोजिब इस तमाम दुनिया में फिर रहे हैं, कि जिस तरह से नेकी व बदी के बारे में “बाबत तलबी फरीकैन के समन मजकूरेवाला राज से जाते हैं” उसी तरह से इन सौदागर महाजनांन के राक्षस विद्या के टीपणे दुनिया में फर रहे है और अलावा इसके चौरासी लाख कुण्डियां भी राध लहू की बनाई है, सो उन कुण्डियों पर चौरासी लाख जीवाजून को दुनिया के नाम से कलपाते है कि जिस तरह से इन टीपणों में बीमारी और मिरगी और काल का हाल दरबारे पड़ने के लिखा है सो पड़ जावे, सो जमीन माता के नाम से जीवाजून कलपाते हैं तो काल भी दुनिया में पड़ जाता है और ग्रहण भी दुनिया में पड़ जाता है, और जिस तरह से कि रावण ने सूरज-चन्द्रमा को बाँधकर अंदाज देखा था कि जमीन के नाम से पाप किया जाता है वोह जमीन को लगता है की नहीं लगता है। इस वजह से बतौर तजरबे के रावण ने दो चार मरतबा ग्रहण भी डाल के देखा था, सो वोह पड़ गया था,
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