सो भाई मेरे हो, जिस तरह से कि आदमी के पेट में रोग-बीमारी के सबब से कीड़े पड़ जाते हैं। इसी तरह से जमीन माता के पेट में रोग चाले की वजह से सैकड़ो तरह के कीड़े पड़ जाते हैं। यह हाल टीपनों के अन्दर हर साल लिखा हुआ आता है कि फलाने साल फलाने किसम की बीमारी शुरु होगी या काल वगैरा पड़ेगा, सो ऐ संसार के लोगों जबकि साल गुजरने के बाद दूसरे बरस आते हैं तो ब्राह्मण लोग काल वगैरा के पड़ने के बारे में तमाम जहान के लोगों को साफ दिल से सुनाते फिरते हैं, परन्तु ब्राह्मण लोगों को तो सुनाने की वजह से कुछ दोष नहीं, परन्तु सौदागर महाजनांन ने कि जो चौरासी लाख कुण्डियों का स्वर्ग-नरक बनाया है वहाँ पर जमीन माता के नाम का पाप कराते हैं, जब तो जमीन माता को लग जाता है; इस वजह से जमीन माता के पेट में कीड़े पड़ जाते हैं और जबकि जीवाजून और आदमियों के नाम का पाप कराते हैं तो पाप होने के सबब से आदमियों को हर तरह की अंग पीड़ा पैदा हो जाती है, गरज कि दूसरी जीवाजून के नाम का पाप कराते हैं तो पाप होने की वजह से आदमियों की तरह से दूसरी जीवाजून भी बीमारी के सबब से तरह-2 की अंग पीड़ा पाती है, और यह बनिये ऐसा भी करते है कि जब किसी के नाम का बाबत मरने के, ज्यादा पाप कराते हैं तो संसार में मरी भी पड़ जाती है और यह बेईमान ऐसा भी करते हैं कि राजा बादशाहों के नाम का पाप-होम करावें तो राजा बादशाह कच्ची उमर में मर भी जाते है; उमर पाके मरे तो कुछ सोच नहीं पर कच्ची उमर में मर जावें तो टीपणों के अन्दर सुनाते ही है कि अब के राजा बादशाहों पर भार है तो फिर उस राजा बादशाहों के नाम का होम पाप चौरासी लाख कुण्डियों के उपर करावें तो उस साल राजा बादशाह मर जाते है। सो पहले टीपणों को सुनाते हैं और फिर चौरासी लाख कुण्डियों के उपर पाप कराते हैं, जिससे तरह-2 की बीमारियां हो जाती है जिसका हाल टीपणों के अन्दर साल-ब-साल बजवानी बामणांन सुनते ही हो कि जो आये बरस टीपणों के अन्दर काल पड़ने के बाबत और रोगचाला फैलने के बारे में और गायें, घोड़ा, उँट वगैरा पर भार होने के बारे मे भी लिखते है, और यह भी लिखते है कि फलाने बरस में तलवार चलने का जोग है क्योंकि टीपणों में यह बात लिखी है सो जब तलवार चलने के नाम का पाप-होम कराते हैं तो तलवार चल जाती है, परन्तु इन सौदागर महाजनांन ने तमाम जहान के लोगों की अकल अपने राक्षसी पाप से ऐसी कैद कर दी है कि इनके जालों को सब साहबान सर आँखों से काम में लाते हैं और ‘मुलाहज़ा’ फरमाते हैं जब भी इस ‘बदहुनर’ के बारे में ऐसी कोशिश नहीं करते हैं कि जिससे राक्षसी पाप इन सौदागर महाजनांन का संसार से दूर हो जावे तो कैसी उमदा बात है, क्योंकि यह सौदागर महाजन जिस साल में तकरार फिसाद होने, सब संसार के पाप करावें तो दुनिया की अकल फिरने के सबब से आपस में लड़ाई करते हैं और फिर उस तनाजे से भाई-2 आपस में लड़कर मर जाते है, सो यह हाल सब जानते ही हो और प्रगट है कि हम तुम में ऐसे-2 हेत इरादे रहे है कि एक-दूसरे को देख करके नाराज होते है बलके रंज व गम में गिरफ्तार हो जाते हैं और जहाँ तक कि मौका मिलता है, एक-दूसरे को जमने नहीं देता है और गरीबों-अमीरों और राजा बादशाहों में ऐसा खार-ऐखार है कि भाई-भाई आपस में यह चाहते है कि मेरा बड़ा भाई मर जावे। तो इसका मल भी मे हाथ आ जापे और छोटा भाई को बड़ा भाई नहीं चाहता है कि यह मर जावे तो सब माल-धन मेरे हाथ आ जावे, गरज कि जितने भाई होवे आपस में एक-दूसरे का यह चाहते है और राजा लोग यह चाहते है कि भाई वेटों और उमरावों वगैरा को गाल दूं तो सब मुलक की पैदायश मेरे हाथ आ जावे, परन्तु यह बुद्धि फिरने का सबब है कि राक्षसी पाप से बुद्धि फेर देते हैं जब ऐसा ही सुझता है, परन्तु यह राजा बादशाहों की भूल है कि जब भाई बेटे सरायत गल जावेंगे तो राजा लोगों को भी कौन राज करने देंगे? परन्तु बुद्धि फिरने से सुझता नहीं हैं। सो ऐसे-2 खार-ऐंखार इस जमाने में रह गये है कि ऐसा हाल और किसी जमाने में नहीं हुआ था कि जो आज हम और तुम और सब संसार अपनी-अपनी आँखों से देख रहे हो, कि उस परमेश्वर के घर में तो सिंह और बकरी शामिल चरी है ऐसा संप और हेत इरादा था।
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