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जगतहितकाऱणी

क्योंकि संसार की बुद्धि राक्षसी पाप में कैद हो रही है इससे नहीं समझा जाता है; क्योंकि जब रावण वगैरा ने पाप चलाया था तो देवता सरुपी जो लोग थे उनको भी नहीं मालूम होता था, जब शनिचर ने वाकिफ किया जब संसार वाकिफ हुआ। इससे में हाथ जोड़कर अरज करता हूँ कि कुल जहान के राजा बादशाह और रैयत एक दिल होकर इन बनियों के राक्षसी पाप को छोड़ाओगे जब तुम्हारे बाल बच्चे बचेंगे, नहीं तो यह सौदागर महाजन इस परमेश्वर की रचना को गारत करके धन अपने काबू में कर लेंगे और इन बनियों की दुकानें दूसरी विलायतों में पहुँच गई हैं सो दूसरे बादशाहों को हिन्दुस्तानन में ला-2 करके हिन्दुस्तान के लोगों को गारत करा देंगे और धन सब बादशाहों का अपने काबू में कर लेंगे और सब को निर्धन कर देंगे, परन्तु इनके जालों की खबर किसी विलायत के राजा बादशाहों और अंग्रेज तक को भी नहीं है और इन सौदागरांन का दिल इस तरह पर है कि जिस तरह से हमने हिन्दुस्तान का धन अपने काबू में कर लिया है, उसी तरह पर दूसरी बादशाहतों का धन काबू में कर लेने के वास्ते यह जाल चलाया है। परन्तु यह सौदागर महाजनांन जब किसी बादशाह को हिन्दुस्तान में लाना चाहते हैं तो उनको रुपिया-पैसा की मदद देते है और हिन्दुस्तान के राज करने का लोभ बताते हैं और जब वोह आने के वास्ते तैयार हो जाते है तो सौदागर लोग उनको हिन्दुस्तान में ले आते हैं और राज करा देते है। तो इस हिन्दुस्तान में वास्ते राज करने के पहले तो मक्का वालों को लाये, तो उन्होंने अरसा तक राज किया बल्कि  “मक्का वालों ने अपने राज अहाते में जबरन हिन्दुओं को मुसलमान किया जिसकी खबर हिन्दुस्तान के लोगों को बिलकुल नहीं पड़ने दी,” जिसकी खास वजह यही है कि उनकी अकल अपने राक्षसी पाप के जादू से इन बनियोंने कैद कर दी थी जिससे खबर नहीं पड़ी, और पहले जमाने का सा धन अब मक्का में भी नहीं रहा, इस वजह से वहाँ के लोग भी दुखी है परन्तु यह खबर ना तो हिन्दुस्तान को ही है और ना मक्का वालों को है कि इन सौदागरांन ने अपने राक्षसी पाप से संसार के लोगों की अकल को खराब करके धन को काबू में कर लिया है, जिससे तमाम दुनिया दुखी है। उसके बाद, वास्ते राज कराने के अंग्रेजों को लाये तो मक्का वालों की तरह से अब यह भी राज कर रहे हैं और जिस तरह से कि मक्का वालों को राज कराने के वास्ते यह सौदागर महाजनांन लाये थे उसी तरह से अंग्रेजों को भी लाये हैं और जिस तरह से कि इन सौदागर महाजनांन ने मक्का वालों का धन अपने कब्जे में कर लिया है उसी तरह से अंग्रेजों का भी धन अपने काबू में कर लेंगे और निर्धन कर देंगे। जब रुस के बादशाह से मिल कर अंग्रेजों के बच्चों को मरवा देंगे और अपने मिलने की खबर अंग्रेजों को और अंग्रेजों के बच्चों को भी नहीं पड़ने देंगे और रुस वालों को लाके हिन्दुस्तान का राज करा देंगे, और जब उनका भी धन काबू में कर लेंगे और रुस वालों को निर्धन कर देंगे फिर और किसी बादशाहत के राजा बादशाह से जा मिलेंगे और जब उनका भी धन काबू में कर लेंगे और रुस वालों की तरह से उनको भी निर्धन कर देंगे और उनके बच्चों को मरवा देंगे। गरज की सौदागर महाजन अपने राक्षसी पाप से सबकी अकलों को भ्रष्ट करके सातों-आठों बादशाहतों के  राजा बादशाहों को हिन्दुस्तान के राज कराने का लोभ देकर के लावेंगे और उनसे हिन्दुस्तान का राज करावेंगे और सब बादशाहों को निर्धन कर देंगे, और राजा बादशाहों को अपने राक्षसी पाप से यह बनिये बाहम लड़ाके मरवा देंगे और अपने जाल की खबर नहीं पड़ने देंगे; क्योंकि इन सौदागरांन का जाल रावण की तरह से अलोप हो रहा है कि जिस तरह से रावण ने लंका में चौरासी लाख कुण्डियों का स्वर्ग-नरक बनाया था, उसी तरह से बलराजा के बाद से इन सौदागर महाजनांन ने राक्षस विद्या का स्वर्ग-नर्क बनाया है सो वोह सौदागर महाजनांन के घर का राक्षसी पाप है और इसी राक्षसी पाप के जादू से कुल जहान के लोगों की अकल फिरी हुई है कि जैसे रावण के वक्त में सबकी अकल फिर गई थी। परन्तु इतना ख्याल कोई भी साहब नहीं करते कि जब रावण ने राक्षस विद्या चलाई थी और रावण की चोरी शनिचर को मालूम हो गई थी, सो शनिचर के मुँह से सुनते ही रावण के राक्षसी पाप को कुल संसार ने एक दिल होकर फौरन तजा दिया, फिर और नहीं चलने दिया और शनिचर को भी ज्यादा नहीं समझाना पड़ा था,

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