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जगतहितकाऱणी

रैयत बगैर राज ही नहीं हैं, क्योंकि पैसे बगैर दुनिया के कारज चले ही नहीं और पैसे बगैर रैयत भर ही जावेगी, और इन सौदागरांन ने काल पड़ा-2 कर धन अपने काबू में कर लिया है और जो कुछ की बाकी रहा हौ उसको भी काल पड़ा-पड़ा के काबू में कर लेंगे और यह सौदागर धन को जहाज में लाद-2 कर रावण की तरह से दरियाओं के पार लिए जाते है, जैसे कि रावण लंका में ले गया था उसी मुवाफिक यह भी ले जाते हैं, और फर पहले से दुनिया में यह बातें भी इन्होंने चलादी है कि सेर कांसी रहेगी वोह दौलतमंद होगा और दुनिया की आँखों देखते धन को ले जाते हैं और दुनिया की बुद्धि भ्रष्ट करके ऐसा सुझाते है कि अंग्रेज ले जाते हैं, और लिये जाते है यह बनिये; सो दुनिया को तो कुछदोष नहीं, क्योंकि दुनिया की बुद्धि तो इन्हों के जादू में इन्होंने कैद कर रक्खी है और आँखों देकते हय बनिये धन को रेल में व जहाज में लादकर लिये जाते है, और दुनिया की बुद्धि भ्रष्ट होने के सबब से खबर नहीं पड़ती है और इन्होंने कैसी अकलमंदी की है, कि यह वनिये जब दूसकी विलायत के लोगों को हिन्दूस्तान में लावेंगे तो वोह दूसरी विलायत के लोग दुनिया से यह बात सुनेंगे कि हिन्दुस्तान का पैसा अंग्रेज ले गये, तो फिर वोह अंग्रेजों से लड़ेंगे और असल में यह बनिये अंग्रेजों से लड़ेंगे और असल में यह बनिये अंग्रेजों से लड़ावेंगे, परन्तु आप यह अलग के अलग और न्यारे के न्यारे रहेंगे, और सेर कांसी की भी बातें इन बनियों ने ही पहले से चलाई हैं, सो यह तो जाहिर दिखाई देवे है कि जब धन हिन्दुस्तान का यह बनिये ले जावेंगे तो सेर कांसी ही बाकी रहा जावेकी और हय बात सेर कांसी वगैरा की और काल वगैरा की चलाई तो पहले से बनियों ने हैं; और साधु फकिरों का नाम लगाकर लिख दिये हैं, कि ऐसा-2 बुरा जमाना दुनिया में आवेगा सो अगर साधु फकीरों को पहले से मालूम होता तो वोह यह भी लिख जाते कि यह बनिये राक्षसी जाल दुनिया का बुरा होने के वास्ते चलावेंगे सो वोह तो बेचारे परमेश्वर की भक्ती करते थे और उसका नाम लेते थे, अपने जीव का भला होने के वास्ते, सो यह बनिये इस जाल को प्रगट और चौड़े ना होने के वास्ते अपने सर रावण के मुवाफिक नहीं लेते हैं, जैसे रावण अपने सर नहीं लेता था और सिवाय इसके और भी बात कैसी लिखकर जाहिर की है कि  “सूरज हजार किरणों से तपेगा जिसकी गरमी से धरती लाल सुरख ताँबे के रंग हो जावेगी और जमीन माता के उपर पानी जो है वोह इस तरह गरम होगा कि जिस तरह से कढ़ाई के अन्दर तेल उबलता है, उस तरह से पानी उबलेगा” सो देखो भाई, उस वक्त में इन राजा बादशाहों का क्या हाल होगा? परन्तु अब लोगों को यह बात निहायत खूबी के साथ सोचनी और समझनी चाहिए और यह जो आगमें इन सौदागर महाजनांन ने किताबों के अन्दर लिखकर जाहिर की हैं, यह कुल सौदागर महाजनांन की जालसाजियाँ हैं क्योंकि सूरज हजार किरणों से नहीं तपेगा, यह तो तमाम जहान को भूल बताई है, परन्तु यह ऐसा तो जरुर करेंगे कि जमीन माता को अग्नि का रोग करके बीमार कर देंगे जिसकी वजह से धरती सुरख ताँबे के रंग हो जावेगी और पानी भी तेल उनटने के मुवाफिक उनटेगा, परन्तु यह जादू खोरा सूरज को तो नाहक बदनाम करते है और सब संसार के लोगों को भूल बताई है कि तपेगा; मेरा लिखना यह है कि सूरज हरगिज-हरगिज नहीं तपेगा, क्योंकि यह तो अपने मामूली कील पर घूमते है और सूरज-चन्द्रमा तो इस तरह से है कि जिस तरह से आदमी के शरीर में ज्योत होती है, उसी तरह से जमीन माता के शरीर में सूरज-चन्द्रमा की ज्योत है, परन्तु इन सौदागर महाजनांन के इन्द्रजाल के पाप से कुल जहान के लोगों की अकल कैसी खराब कर दी है कि जिससे सब लोगों को ऐसा ही मालूम होता है कि यह राक्षसी वेद की किताबें अगले सती लोगों की लिखी हुई है जिससे उनको काम में लाते है, परन्तु उनको यह बिलकुल मालुम नहीं है कि जितनी किताबें राक्षसी वेद की है वोह कुल इन सौदागर महाजनांन की हैं और इनकी चलाई हुई है, परन्तु नाम उन किताबों में अगले सती लोगों का लिखकर जाहिर किया है, जिससे तमाम लोग उन किताबों को पढ़ते हैं, और उन्हीं के उपर चलते है। हालांकि रात-दिन खराब होते जाते हैं तो भी नहीं समझते हैं कि इन बनियों ने रावण के मुवाफिक राक्षसी वेद की किताबेंऔर टीपणा वगैका चलाये हैं

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