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जगतहितकाऱणी

और चौरासी लाख कुण्डियाँ भी राध लहू की बनाई थी, यह बात दुनिया में मशहूर है, परन्तु जबकि कंश राजा के राक्षसी पाप की खबर पड़ी जब तमाम दुनिया के राजा बादशाहों ने एक दिल होकर कंश राजा के राक्षसी पाप को छोड़ाया जब तमाम दुनिया बची है, नहीं तो कंश राजा भी तमाम दुनिया को मार के धन अपने काबू में कर लेता; इसी तरह से कारुन बादशाह ने राक्षस विद्या के वेद और किताबें और टीपणा वगैरा दुनिया में चलाये थे और राक्षसी पाप का स्वर्ग बनाया था और चौरासी लाख कुण्डयाँ भी बनाई थी, सो उन कुण्डयों पर चौरासी लाख जीबाजून को कलपाता था जबकि कारुन बादशाह के राक्षसी पाप की खबर पड़ी जब तमाम दुनिया और राजा बादशाहोंने एक दिल होकर कारुन बाहशाह के राक्षसी पाप को छोड़ाया जब तमाम दुनिया बची है, नहीं तो कारुन बाहशाह भी तमाम दुनिया को मारकर धन अपने काबू में कर लेता, सो यह बात दुनिया में प्रगट है और जो कि राजा रावण ने और कारुन बादशाह ने राक्षसी पाप चलाया था, सो उन्हों के पाप को तमाम जहान ने एक दिल होकर के छोड़ाया था जब तमाम दुनिया बची थी, वरना औलाद दुनिया की नहीं रहती; परन्तु इन चारों शख्सों ने जो राक्षसी पाप चलाया था उनके नाम भी बदल-2 कर रक्खे थे कि जिससे हमारा राक्षसी जाल मालूम नहीं होगा, जिनकी तारिफ मय नाम के हवाला कलम है कि जो रावण ने राक्षसी पाप चलाया था उसका नाम ‘इन्द्रजाल’ रखा था, जिसको शनिचरजी महाराज ने तमाम जहान में मशहूर कर दिया था और हरनाकुश राजा ने जौ राक्षसी पाप चलाया था, उसका नाम ‘राक्षस विद्या’ रखा जिसको नरसिंधजी ने दुनिया में प्रगट किया, और कंस राजा ने जो राक्षसी पाप चलाया था उसका नाम ‘जादूचाला’ रखा कि जिसको श्री कृष्ण महाराज ने संसार में प्रगट किया, और कारुन बादशाह ने जो राक्षसी पाप चलाया उसका नाम ‘काफिक विद्या’ रखा कि जिसको गुरुनानक ने प्रगट किया; याने पाप तो वोह का वहीं था परन्तु नाम हस वजह से बदल-2 कर रखे थे कि जो एक नाम से ही पाप मजकूर चलाया जावेगा जब तो दुनिया समझ जावेगी फिर हमको कौन पाप करने देगा? और जबकि नाम इस पाप के बदल कर रखेंगे तो हमारा जाल एकाएक जाहिर नहीं हो सकेगा, इससे एसे-2 नाम बदलकर रक्खे थे, परन्तु बलराजा के बाद से इन सौदागर महाजनांन ने भी रावण हरनाकुश वगैरा की तरह से राक्षसी पाप चलाया है, परन्तु पाप तो वोह का वही है, लेकिन नाम इन्होंने भी बदल कर रखा है कि जिसको तमाम हिन्दू-मुसलमान और सब लोग कलूकाल कहते हैं सो बोह सौदागर महाजनांन के घर का राक्षसी पाप है कि जीस तरह से रावण वगैरा ने चलाया था, उसी तरह पर इन सौदागरांन का राक्षसी पाप चल रहा है और इन सौदागर महाजनांन ने भी रावण की तरह से राक्षसी वेद की किताबें और टीपणा वगैरा दुनिया में चलाये हैं कि जो आज दुनिया में चल रहे हैं, यह सब इन्द्रजाल है जिसको हिन्दू-मुसलमान, अंग्रेज और सब सृष्टि देख रही है, और इन सौदागर महाजनांन ने पहले से यह कैसी अकलमंदी की है जो अगले जमाने के सती लोग हुए है, उनके नाम किताबों में लिखकर जाहिर किये हैं और ऐसा भी लिखा है कि “अब ऐसा जमाना तंग आवेका कि जिसके घर में एक सेर कांसी रहेगी वोह दौलतमंद कहलायेगा”। सो यह किताबें जिसमें दुनिया के बुरा होने का लिखा है वोह इन सौदागरों ने ही राक्षसी जाल की किताबें चलाई हैं और अगले सती लौगों के नाम उन किताबों मे लिख दिये हैं इस वास्ते, कि आप प्रगट न हो, और यह भी लिखा है कि वोह सेर कांसी भी राजा बादशाहों के घरों में रहेगी। सो देखो भाई, इस जमाने में तो राजा बादशाह हाथी, घोड़ा, फौज वगैरा केई किसम के आराम उठाते हैं फिर जबकि सेर भर कांसी रह जीने की नौबत पहुँचेगी उस वक्त में इन राजा बादशाहों का क्या हाल होगा? सो यह बात काबिल ख्याल करने के है कि सेर भर कांसी में से क्या तो अपने खरच में लावेंगे और क्या दुनिया के कारज करेंगे और क्या फौज रखेंगे और कहाँ से अच्छा कपड़ा-जरीव रेशम का पहनेंगे? जब सेर भर कांसी रह जावेगी तो रैयत वगैरा तो सब भर जावेगी, क्योंकि सब काम रुपया-पैसा से होता है, ब्याह-शादी में कपड़ा वगैरा कहाँ से आवेगा और बगैर बलद-गाये के खेती-बाड़ी के काम किस तरह से चलेंगे? और बगैर पैसे के दुनिया का कोई कामनहीं चल सकता है और जब रैयत तबाह हो जावेगी तो राजा बादशाह क्या करेंगे?

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