नहीं पहचानते थे, उन्होंको वाकिफ करके पहजानवाया, नहीं तो सब लोग अंधो की तरह से थे; और जो रावण ने शनिचरजी को राक्षसी पाप से नहीं कलपाया होता तो रावण जरुर कुल जहान को गारत करके अपना राज कर लेता, परन्तु शनिचरजी महाराज ने अपने उपर दुख पड़ते ही रावण का राक्षसी पाप तमाम जहान में प्रगट कर दिया, जिसके सुनने से सब लोग फौरन समझ गये कि जो लंका में रावण राक्षसी पाप कराता था उसको तमाम खलकत ने एक दिल होकर बिलकुल मिटा दिया, जबसे जहान की औलाद को सुख प्राप्त हुआ है, नहीं तो औलाद दुनिया की नहीं रहती क्योंकि रावण तमाम दुनिया को गारत करके सातों-आठों विलायतों को अपने कब्जे में कर लेता और अपना राज करता, जिसका सबूत पुराणों वगैरा से साबित है बलके “ राक्षसी वेद की किताबें और टीपणा वगैरा चलाये थे और रतनागर सागर के उपर लंका शहर बसाया था कि जहाँ हजारों कोसों में पानी भरा हुआ पड़ा है” , जिसका हाल पुराणों वगैरा में लिखा है कि रावण ने लंका समुद्र के बीच में आबाद की थी और स्वर्ग-नरक बनाया था और चौरासी लाख कुण्डियाँ राध लहू की बनाई थी, सो उन कुण्डियों के उपर रखेश्वरों के नाम की जिसकी वजह से लंका में कोई नहीं जा सकता था, जो कोई लंका में जाने के वास्ते समुद्र की तरफ जाता तो जादू चाले से डूबो देता और लंका के उपर किसी को नहीं जाने देता था, और दुनिया यह जानती थी कि रावण लंका में इन्द्रजाल की वजह से नहीं जाने देता है और जो कि सुपना और ग्रह चाला दुनिया में जारी हुए हैं यह भी रावण के जमाने से हुए है और जो रावण के राक्षसी वेद की किताबें और टीपणा वगैरा दुनिया में चला करके सबकी अकलों को खराब कर दिया था, सो हय बात भी वेद की किताबों में लिखी हुई है कि रावण ने राक्षसी वेद की किताबें और टीपणा वगैरा दुनिया की अकल को फेरने के लिए चलाये थे, जिसका सबूत पुराणों वगैरा से साफ प्रगट होता है, परन्तु रावण के जाल मिटाने के वास्ते तमाम दुनिया लंका में पहुँचने के वास्ते तैयार हुई, परन्तु दुनिया को हय पता नहीं लगा कि लंका में किस तरह से जा सकेंगे ? फिर कुछ अरसा दुजरने के बाद यह तज़वीज की, कि तमाम सृष्टि के राजा बादशाह और रैयत वगैरा ने एका करके बड़ी भारी फौज बनाई और जो कि राजा रावण के भाई-बेटे, फौज समेत हिन्दुस्तान में रहते थे उनको पकड़-2 कर पूरा-2 तंग किया जब रावण के भाई भविक्षण ने, कि रावण का राक्षसी पाप चलाया हुआ था वोह तमाम राजा बादशाहों को और दुनिया वगैरा को भविक्षण ने बता दिया; देखो जबकि शनिचर ने रावण के राक्षसी पाप का पता लगा दिया था और वाकिफ किया जब दुनिया की औलाद बची है, परन्तु रावण तमाम दुनिया को मार के धन अपने काबू में कर लेता तो शनिचर का नाम इस दुनिया के उपर सिर्फ नेकी करने की वजह से अमर रहा है, कि जौ रावण का राक्षसी पाप था। उससे दुनिया को बचाई। इसी तरह से हरनाकुश ने भी राक्षस विद्या चलाई थी, जब भी तमाम दुनिया की बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी, परन्तु उसके जमाने में भी तमाम दुनिया ने और राजा बादशाहों ने एक दिल होकर हरनाकुश के राक्षसी पाप को छोड़ाया जब तमाम दुनिया बची, नहीं तो हरनाकुश भी तमाम दुनिया को गारत करके धन अपने काबू में कर लेता और हरनाकुश ने भी राक्षस विद्या का स्वर्ग और नरक बनाया था और अलावा इसके चौरासी लाख कुण्डियां भी राध लहू की बनाई थी, सो उन कुण्डियों के उपर दुनिया के नाम का पाप कराता था, इससे दुनिया की अकल खराब हो गई थी जबकि हरनाकुश के राक्षसी पाप की खबर दुनिया को नरसिंधजी के कहने से मालूम हुई, जब तमाम संसार ने दिल में विचार करके कहा कि यह जितनी खराबियां दुनिया में होती है यह कुल हरनाकुश के राक्षसी पाप का फितूर है, जब भी तमाम राजा बादशाहों ने एक दिल होकर हरनाकुश के राक्षसी पाप को छोड़ाया जब तमाम दुनिया बची है, और जो हरनाकुश का राक्षसी पाप नहीं मिटता तो हरनाकुश भी चार कूंट में और चौदा भांण में अपना राज करता, परन्तु संसार ने हेत करके हरनाकुश के राक्षसी पाप को मिटा दिया, इससे दुनिया सलामत रही है; उसके बाद कंस राजा ने भी राक्षस विद्या का पाप चलाया था, और अलावा इसके राक्षस विद्या के वेद और टीपणा वगैरा चलाया था और राक्षसी पाप का स्वर्ग-नरकभबनाया था और चौरासी लाख कुण्डियाँ भी राध लहू की बनाई थी, |