Home About Us Gallery Artical English Contact Us
    Book  
     परमात्माने नमः
     इन्द्रजाल
     रोग-बीमारी
     राक्षसी पाप
     जमीनमाता
     इन्द्रजाल पाप
     चौरासी लाख
     पाप चलाया ह
     गौत्तम ऋषिजी
     सौदागर महाजनांन
     राक्षसी विद्या
     सो वेद-पुराणों
     रकाषसी पाप
     कुण्डियों
     कारुन बादशाह
     हिन्दू-मुसलमानों
     अंग्रेजों
     डॉक्टरों की रोटी
     स्वर्ग-नर्क
     बुद्धि भ्रष्ट
    Artical  
     What is Earth
     जीव हत्या
     राक्षसी मायाजाल
   
   
   
   
   
   
 
जगतहितकाऱणी

साधु अनूपदास

परमात्माने नमः
हजार हजार शुक्र उस ज्योति स्वरुप निरंजन निराकार का है कि जिसने जमीन व आसमान को बनाया और तमाम सृष्टि को पैदा किया, परन्तु उसकी कारीगरी का भेद किसी पर जाहिर नहीं हुआ कि क्या भेद है, फिर मेरी जबान से ईश्वर परमात्मा की तारिफ अदा नहीं हो सकती, और दूसरा मजमून बतौर समुद्र के है सो कलम से लिखा जाता है कि जो – 2 करतब मैंने इन सौदागर महाजनांन के देखे वोह अजब तरह के नजर आये जिससे मुझ गरीब साध अनूपदास को तमाम जहान के हिन्दू – मुसलमान और साधु-संत और पंडित-फकीर और मुलकों-मुलकों के राजा महाराजा और सातों आठों और सब विलायतों के बादशाह और दीगर अंग्रेज वगैरा की खिदमत में हाथ जोड़कर अरज करना लाजिम आया कि “जिसको जादू चाला और राक्षस विद्या और काफिर विद्या और, इन्द्रजाल कहते है वोह एक किसम का पाप है” कि जिस तरह से रावण ने चलाया था और मेह और मौत को कब्जे में कर ली थी, पाप के सबब से याने होम करा-2 के बुद्धि भी भ्रष्ट कर दी थी । इन्द्रजाल के पाप से और काल वगैरा पड़ा-2 करके लक्ष्मी अपने काबू में करके लंका में ले गया था और उसी तरह से हरनाकुश राजा ने भी चलाया था और उसी तरह से कंश राजा ने भी चलाया था और उसी तरह से कारुन बादशाह ने भी चलाया था और रावण, हरनाकुश, कंश, कारन वगैरा की तरह से बलराजा के बाद से इन सौदागर महाजनांन ने भी मेह को और मोत को सहारे कर ली है और बुद्धि भ्रष्ट करदी है; पाप के सबब से कि जिस दिन से इस हिन्दुस्तान में काल पड़ाना बलराजा के बाद से शुरु किया है, सो इन्होंने भी काल पड़ा-2 के रावण वगैरा की तरह से लक्ष्मी औऱ धन काबू में कर लिया है और जहाजों में लाद-2 के दरियाओं के पार ले गये हैं जैसे कि रावण लंका में ले गया था उशी तरह से यह बनिये भी दरियाओं के पार ले गये हैं, सो यह राक्षसी पाप धन लेने के वास्ते काल पड़ाने का पाप चलाया है सो धन हिन्दुस्तान का तो काबू में कर लिया है, परन्तु धन हिन्दुस्तान में बहुत था और अलावा इसके दूसरी बादशाहतों में भी बहुत था जिसका सबूत वेद की किताबों में लिखा है कि, सतजग में सोने का ठाट और पाट था और गरीब गुरबा के घऱ में सोने-चाँदी के बर्तन थे और पग-पग रत्नों की खानें सुनी जाती थी कि जिसकी कुछ गिनती नहीं हो सकती थी, सो राजा बादशाहों के टोटा किस बात का था ? इस सबब से तमाम खलकत को यकीन दिलाया जाता है कि बलराजा के जमाने तक मौजूद होने खांनहाये सोना-चाँदी वगैरा के सतजग रहा, क्योंकि उस जमाने में चाँदी-सोने का ठाट और पाट था और धान वगैरा भी बहुत होता था क्योंकि सतजग में काल वगैरा नहीं पड़ता था इससे धान वगैरा सतजग में बहुत होता था । जब से इन महाजनांन ने काल पड़ाना शुरु किया है, जिस दिन से दिन-2 जमाना बुरा होता जाता है और काल वगैरा यह बनिये लोग नहीं पड़ावे तो सदा सतजग ही है, परन्तु बलराजा के बाद से जो तरह-2 के रोग और काल वगैरा पड़ाने शुरु किये है जबसे धन दुनिया का खेंच रहे है और सबको निर्धन कर दिया है बलके दिन-2 बुरा होता जाता है, सो यह फितूर सौदागरांन के राक्षसी पाप का है क्योंकि इन्हों कि दुकानें दूसरी बादशाहतों में पहुँच गई है सो अब उनके बाल बच्चों को गारत करके उनका धन भी काबू में करेंगे कि जिस तरह से हिन्दुस्तान को गारत कर दिया है उसी तरह से दूसरी बादशाहतों को भी गारत करेंगे और अलावा इसके कि जिन बादशाहों को हिन्दुस्तान में लाना चाहते हैं तो हिन्दुस्तान का लोभ बता-2 के सब बादशाहों को गारत कर देंगे और आप मिले के मिले रहते है और हिन्दू मुसलमान के बच्चों को दूसरी विलायतों से मरवा देते है और अपने बच्चों को बचाये रखते है और होले-2 आखिर में सातों आठों विलायतों को गारत करा देवेंगे; जैसे कि रावण ने दुनिया के गारत करने को जाल चलाया था कि सब विलायतों में जब थोड़े-से आदमी रह जावेंगे जब मेरा चार कूंट में राज हो जावेगा, तो कोई मेरा राज छीन नहीं सकेगा। उसी तरह से इन बनियों ने भी यही सोचकर यह जाल चलाया है और पहले ही सबकी अकल अपने राक्षसी पाप से खराब कर देते है, क्योंकि सातों आठों विलायतों के लोग हिन्दुस्तान के लोभ के वास्ते आपस में लड़-लड़ के गारत हो जावेंगे जब सातों आठों और सब विलायतों में आदमी थोड़े रह जावेंगे तो चार कूंट में हमारे बच्चों का राज हो जावेगा तो फिर हमारा राज कोई नहीं छीन सकेगा: जब सब विलायतों में आदमी थोड़े रह जावेंगे और यह बनिये यह जानते है कि हमारी औलाद ज्यादा रह जावेगी तो फिर हमारा राज कोई नहीं छीन सकेगा, सो तो दुनिया में हिन्दुओं में कहते है कि ऐसा कलजग आवेगा कि सौ (100) कोस छोटा-सा एक गांवड़ा मिलेगा और मुसलमानों में यह कहते हैं कि चौदहवीं (14) सदी ऐसा बुरा वक्त आवेगा कि काल वगैरा बहोत होगा और रीजक वगैरा कम होगा सो आदमी को आदमी खाने लगेगा, सो पहले से ही ऐसी-2 बातें दुनिया में चला दी है, सो दुनिया में अच्छे-2 बड़े गुणी लोग कहते हैं सो जैसे दुनिया में बुरा होने के पहले से बात चलाई है उसी के मुवाफिक दुनिया के नामका इन्द्रजाल का पाप कराते हैं वैसा ही बुरा हो जाता है, और यह ऐसी-2 बातें बुरा होने की चलाई तो बनियों ने है और अगले सती लोगों के सर अपने बचाव के वास्ते रख देते हैं, सो वोह लोग तो हमारे तुम्हारे मुवाफिक आदमी बन्दा थे क्योंकि रचना तो पैदा करन्ते ने रची है। उस पैदा करन्ते ने अपने नाम के वास्ते, क्योंकि बो तो पैदा करन्ता सब संसार और सब विलायतों के उपर दया रखते हैं; यह तो काफरी पाप और इन्द्रजाल का पाप कराने वाले बेईमान पाप कराते हैं जिससे दुनिया में बुरा होता है और काफरी पाप और इन्दजाल का पाप दुनिया में कई बार चलाया है और दुनिया ने दुख पा-पा कर छोड़ाया है जब दुनिया की औलाद बची है, और यह कदीमी जाल याने ठेट से बनियों का ही है और बनिये लोगों ने ही चलाया है और रावण, हरनाकुश और कंश, कारुन वगैरा को अपने पाप में से थोड़ा-सा सिखा करके इन बनियों ही ने जाल में डाल करके मरा दिये है और तमाम कदीमी जाल अपने पास ही रखते है और वोह पाप चौड़े नहीं आने देते है और इनका जाल पकड़ा नहीं जाता है, इस सबब से दुनिया में दुख रहता जाता है, क्योंकि इनका पाप अलोप है इससे मालूम नहीं हो सकता है और जो मेरे को इन्होंने समामुख कलपाया है जैसे कि रावण ने शनिचर को समामुख कलपाया था और शनिचर को मालूम पड़ी और संसार को वाकिफ किया था, उसी तरह से मेरे को भी समामुख कलपाते है जिससे मुझको भी मालूम पड़ी है, जिससे आप लोगों को वाकिफ करता हूँ सो हिन्दुस्तान में रावण, हरनाकुश, कंश, कारुन वगैरा ने इन बनियों के शामिल ही जनम पाया था, जब उनको ही खबर नहीं पड़ी तो दूसरी विलायतों के राजा बादशाहों को क्या खबर पड़ने देंगे? और सातों-आठों विलायतों और अंग्रेजों वगैरा के आगे मेरी हाथ जोड़के अरज है कि जब रावण वगैरा को इनन बनियों ने खबर नहीं पड़ने दी तो आप लोग तो दूसरी विलायत के हो, आपको किस तरह से खबर पड़ने देंगे? और मैं इस वास्ते लिखता हूँ कि आप लोग तो आठ सात विलायत है और यहाँ हिन्दू-मुसलमान के बच्चे सिवाय इन बनियों के अगर गरीब होकर भी रहेंगे तो जादू से बुद्धि भ्रष्ट करके और आपस में लड़ा करके मार देवेंगे, जब आप लोगों को मालूम होगा कि हिन्दू-मुसलमान बदमाश है और आप लोगों को यह मालूम नहीं कि तमाम संसार की जादू से बनियों ने बुद्धि भ्रष्ट की है जब भी आप सातों-आठों विलायतों के हाथों से मरवा देंगे, सो आप लोग इन कुलंकियों का जाल छोड़ाओगे तो आप लोगों की और सब ही की औलाद उभरेगी और आपके ‘इकबाल’ से हिन्दू-मुसलमान की औलाद भी उभरेगी, याने सब संसार की; और खुद यह बनिये आप लोगों से मिले के मिले रहते हैं और अपने दगा की खबर नहीं पड़ने देते है और आखिर में दगा से आप लोगों के बच्चों को भी गारत करेंगे, सो इन बनियों ने अपना राज चार कूंट में करने के वास्ते और अपने मतलब के वास्ते यह जाल चलाया है जिससे आप लोगों को हिन्दुस्तान में लाते हैं, सो सातों-आठों विलायतों को आपस में लड़ा-2 कर गारत कर देंगे, फिर यह कुलंकी जब संसार थोड़ा रह जावेगा जब अपना राज करेंगे, जिससे हिन्दुस्तान में दूसरी बादशाहत के लोगो को लाते है, परन्तु यह जाल इन सौदागर महाजनांन ने बलराजा के बाद से चलाया है और दूसरी बादशाहत को और सातों-आठों और सब विलायतों में

  Previous   1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17.... 30.....50....60....   next  
Home About Us Artical Gallery Contact Us Download Hindi Font
Copyiright @ 2007 Jagathitkarni.org. All rights reserveed